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रणथम्भौर में रोमांचक नज़ारा, त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर सड़क पर दिखा टाइगर ‘आरबीटी-2511 मलंग’

 
रणथम्भौर में रोमांचक नज़ारा, त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर सड़क पर दिखा टाइगर ‘आरबीटी-2511 मलंग’

रणथम्भौर क्षेत्र में रविवार दोपहर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को उस समय एक अविस्मरणीय और रोमांचक अनुभव मिला, जब जंगल की गहराइयों से निकलकर युवा बाघ ‘आरबीटी-2511 मलंग’ अचानक त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर आ गया। इस अप्रत्याशित दृश्य ने कुछ समय के लिए वहां मौजूद लोगों को स्तब्ध कर दिया, जबकि पर्यटकों के लिए यह पल किसी रोमांचक सफारी से कम नहीं था।

जानकारी के अनुसार, यह घटना दोपहर के समय उस मार्ग पर हुई जो रणथम्भौर के घने वन क्षेत्र से होकर प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर की ओर जाता है। इसी दौरान युवा टाइगर ने जंगल से निकलकर सड़क पार की और कुछ देर तक आसपास के क्षेत्र में मौजूद रहा। सड़क पर टाइगर की मौजूदगी से वाहनों की आवाजाही भी कुछ समय के लिए धीमी हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टाइगर शांत मुद्रा में सड़क पर चला और कुछ दूरी तक आगे बढ़ने के बाद फिर से जंगल की ओर लौट गया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वहां मौजूद पर्यटक और श्रद्धालु दूर से ही इस दृश्य को कैमरों में कैद करते रहे। कई लोगों ने इसे जीवन का एक दुर्लभ और रोमांचक अनुभव बताया।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रणथम्भौर क्षेत्र में बाघों की सक्रियता अक्सर देखी जाती है, क्योंकि यह उनका प्राकृतिक आवास क्षेत्र है। ऐसे में जंगल से सटे मार्गों पर कभी-कभी वन्यजीवों की आवाजाही सामान्य मानी जाती है। हालांकि, पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग लगातार निगरानी बनाए रखता है।

त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग विशेष रूप से धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आवाजाही करते हैं। ऐसे में वन्यजीवों की उपस्थिति को देखते हुए प्रशासन द्वारा पहले से ही सावधानी बरतने के निर्देश जारी किए जाते हैं।

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि ऐसे क्षेत्रों में यात्रा करते समय सतर्क रहें और किसी भी वन्यजीव को देखकर न तो उसके करीब जाएं और न ही उसे परेशान करें। साथ ही वाहन चालकों को भी निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने की सलाह दी गई है।

इस घटना के बाद एक बार फिर रणथम्भौर की जैव विविधता और बाघों के प्राकृतिक आवास की महत्ता पर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के दृश्य यह दर्शाते हैं कि रणथम्भौर में वन्यजीव आज भी अपने प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं।

फिलहाल टाइगर के सुरक्षित जंगल में लौट जाने के बाद स्थिति सामान्य हो गई है, लेकिन यह दृश्य पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए लंबे समय तक यादगार बना रहेगा।