कुदरत का कहरक्यू! सवाईमाधोपुर में बाढ़ के कारण अमरूदों के बगीचे बहे, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
प्रकृति के प्रकोप ने एक बार फिर किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। क्षेत्र के किसान कुछ दिन पहले आई बाढ़ के कहर से अभी तक उबर नहीं पाए हैं। किसानों के दर्जनों बगीचे पानी में डूब गए हैं। सूरवाल से लेकर जड़ावता और चकेरी गांव तक अमरूद के बगीचे पानी के तेज बहाव में बह गए हैं। इससे किसानों को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार बाढ़ के कारण क्षेत्र में पांच हजार अमरूद के बगीचे जलमग्न हो गए हैं। इनमें से 470 हेक्टेयर में लगे अमरूद के बगीचे पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। जिले में 14 हजार से अधिक परिवार अमरूद की बागवानी करते हैं। वहीं किसानों की आजीविका अमरूद की खेती पर निर्भर करती है। ऐसे में आजीविका का मुख्य साधन भी अमरूद की बागवानी ही है, लेकिन पिछले दिनों हुई भारी बारिश ने किसानों की अमरूद की बागवानी को बर्बाद कर दिया है। पानी के तेज़ बहाव के कारण अमरूद के बागों में गड्ढे बन गए हैं। इससे अमरूद के पेड़ जड़ समेत उखड़कर पानी में बह गए हैं।
470 हेक्टेयर ज़मीन क्षतिग्रस्त
उद्यानिकी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में बाढ़ के कारण 470 हेक्टेयर अमरूद के बागों को नुकसान पहुँचा है। करमोदा, दौंदरी, सूरवाल, मैनपुरा, अजनोटी, दुब्बी बिद्रखान, पूसोदा, गोगोर, सेलू, पढ़ाना, जड़ावता, लोरवाड़ा, जटवाड़ा, सुनारी, बंधा, दोबारा कलां, दोबारा खुर्द, जीनापुर, गंभीरा, आटौन कलां, पचीपल्या, गोठरा, मखौली, कांसीर आदि गाँवों में अमरूद के बागों को नुकसान पहुँचा है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार, इन गाँवों में 40 प्रतिशत से ज़्यादा अमरूद के बाग पानी के बहाव के कारण नष्ट हो गए हैं।
जिले में अमरूद के बाग हैं
जिले में सूरवाल, करमोदा, दौंदरी, मथुरापुर, आटूंकला, गुदासी, शेरपुर-खिलचीपुर, श्यामपुरा, ओलवाड़ा, पढ़ाना, मैनपुरा, अजनोटी, भाड़ौती, सेलू, रानवाल, गंगापुर सिटी, बामनवास आदि स्थानों पर किसानों ने 14 हज़ार हेक्टेयर में अमरूद के बाग लगाए हैं। जिला मुख्यालय के आसपास का क्षेत्र रामसिंहपुरा, करमोदा, सूरवाल समेत कई गाँव अमरूद की अच्छी पौध के लिए जाने जाते हैं। यहाँ बर्फखाना गोला, लखनऊ 49, इलाहाबादी, सफेदा किस्म के अमरूदों के पौधे तैयार किए जाते हैं।
बाढ़ से बर्बाद
परिवार की आजीविका अमरूद की बागवानी पर निर्भर है, लेकिन बाढ़ से अमरूद के बाग पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। ऐसे में आर्थिक समस्याएँ पैदा हो रही हैं। सरकार को जलभराव से प्रभावित बागों को तुरंत मुआवजा देना चाहिए।
पेड़ उखड़ गए
अमरूद की बागवानी आय का मुख्य स्रोत है। बाढ़ के कारण अमरूद के बाग में दूर-दूर तक गड्ढे बन गए हैं। अमरूद के पौधे जड़ों सहित उखड़कर पानी में बह गए हैं। सरकार को जल्द ही नुकसान की भरपाई करनी चाहिए।
पहले ध्यान दिया होता तो इतना नुकसान नहीं होता
कर्ज लेकर अमरूद के पौधे लगाए थे, लेकिन बाढ़ के कारण सारे सपने चकनाचूर हो गए हैं। अगर प्रशासन ने पहले ध्यान दिया होता तो आज यह नौबत नहीं आती। अब पानी में डूबे अमरूदों का जल्द ही मुआवजा दिया जाना चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
तथ्य फ़ाइल
-जिले में अतिवृष्टि के कारण किसानों को 4 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
-जिले में 14 हज़ार किसानों की आजीविका अमरूद की खेती पर निर्भर है।
-अत्यधिक वर्षा के कारण किसानों के खेतों में लगे 40 प्रतिशत से अधिक अमरूदों को नुकसान पहुँचा है।
-बाढ़ के कारण जिले में 470 हेक्टेयर अमरूद के बाग बह गए।
-बाढ़ में पाँच हज़ार हेक्टेयर से अधिक बाग जलमग्न हो गए।
