रणथंभौर में उम्रदराज बाघिन टी-39 नूर की अनोखी गतिविधि, 11 किमी दूर जाकर किया शिकार
Ranthambore Tiger Reserve में एक बार फिर मशहूर बाघिन टी-39 नूर चर्चा में है। राज्य की सबसे उम्रदराज बाघिन मानी जाने वाली नूर ने अपने निर्धारित क्षेत्र से करीब 11 किलोमीटर दूर जाकर सफलतापूर्वक शिकार किया है, जिसने वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यटकों दोनों का ध्यान आकर्षित किया है।
वन विभाग के अनुसार, बाघिन टी-39 नूर लंबे समय से अपने स्थायी क्षेत्र में सक्रिय रही है, लेकिन हाल के दिनों में उसकी मूवमेंट पैटर्न में बदलाव देखा गया है। इस बार वह अपने इलाके से काफी दूर निकलकर नए क्षेत्र में पहुंची और वहां शिकार कर वापस लौट आई।
Rajasthan Forest Department के अधिकारियों का कहना है कि बाघिन का इस तरह लंबी दूरी तय करना और सफल शिकार करना उसके शारीरिक स्वास्थ्य और शिकार कौशल को दर्शाता है, जो उसकी उम्र को देखते हुए बेहद उल्लेखनीय माना जा रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बाघों का अपने क्षेत्र से बाहर जाकर शिकार करना असामान्य नहीं है, खासकर तब जब उनके इलाके में शिकार की उपलब्धता या प्रतिस्पर्धा बदलती है। हालांकि, टी-39 नूर जैसे उम्रदराज बाघ के लिए यह व्यवहार काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह उसके जीवित रहने की क्षमता और अनुकूलन को दर्शाता है।
Ranthambore Tiger Reserve भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्व में से एक है, जहां बाघों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाती है। यहां लगे कैमरा ट्रैप और वन विभाग की टीमें हर गतिविधि को रिकॉर्ड करती हैं, जिससे बाघों के व्यवहार का अध्ययन किया जा सके।
नूर की यह गतिविधि पर्यटकों के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि वह रणथंभौर की सबसे प्रसिद्ध बाघिनों में से एक है। उसकी उम्र और अनुभव को देखते हुए वन्यजीव प्रेमी इसे एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण घटना मान रहे हैं।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि बाघिन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में गश्त भी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह का मानव-वन्यजीव संघर्ष न हो।
फिलहाल इस घटना को रणथंभौर की बाघिनों के व्यवहार और पारिस्थितिकी को समझने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है, जो भविष्य में संरक्षण रणनीतियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
