बालविवाह होने पर भी विधवा को नौकरी का आरक्षण मिलेगा, हाईकोर्ट ने सरकार को फटकारा
राजस्थान हाईकोर्ट ने बालविवाह और विधवा महिलाओं के रोजगार आरक्षण को लेकर अहम आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर किसी महिला की शादी कम उम्र में हुई और बाद में वह विधवा हो गई है, तो उसे सरकारी नौकरी में विधवा आरक्षण का लाभ अवश्य मिलेगा।
यह आदेश उस समय आया जब एक विधवा महिला ने सरकारी नौकरी में आरक्षण का लाभ लेने से इनकार किए जाने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि उसकी शादी कम उम्र में हुई थी और पति की मृत्यु के बाद वह विधवा हो गई, लेकिन सरकार ने उसे नौकरी में विधवा आरक्षण का लाभ नहीं दिया।
हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार को फटकारते हुए कहा कि कानून में कहीं भी यह शर्त नहीं है कि विधवा केवल तभी आरक्षण की पात्र होती है जब उसकी शादी कानूनी उम्र के बाद हुई हो। अदालत ने आदेश दिया कि कम उम्र में शादी होने पर भी विधवा महिला को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि ऐसे सभी मामलों में विधवाओं को आरक्षण का लाभ तुरंत प्रदान किया जाए और भविष्य में इस तरह के विवाद पैदा न हों। अदालत ने स्पष्ट किया कि विधवा होने की स्थिति में नौकरी में आरक्षण केवल उम्र या शादी के समय पर निर्भर नहीं करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। इससे कम उम्र में शादी करने वाली विधवाओं को सरकारी नौकरी और आर्थिक स्वतंत्रता पाने का अधिकार सुनिश्चित होगा।
राजस्थान में पहले कई विधवाओं को बालविवाह की वजह से आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा था, जिससे उन्हें सरकारी नौकरी और सामाजिक सुरक्षा में बाधाओं का सामना करना पड़ता था। हाईकोर्ट के इस आदेश से यह स्थिति बदल सकती है और विधवाओं के लिए नौकरी में आरक्षण सुनिश्चित होगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि विधवाओं के अधिकारों की रक्षा और सरकारी नीतियों में न्यायसंगत कार्यान्वयन अनिवार्य है। सरकार को सभी संबंधित विभागों को निर्देश जारी करने होंगे ताकि इस फैसले का पालन समयबद्ध तरीके से किया जा सके।
