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विनय धर्म का मूल है, जहां विनय होता है वहीं ज्ञान फलता है : प्रवर्तक सुकन मुनि

 
विनय धर्म का मूल है, जहां विनय होता है वहीं ज्ञान फलता है : प्रवर्तक सुकन मुनि

धर्म में विनय का विशेष महत्व है। जहां विनय और नम्रता होती है, वहीं सच्चे ज्ञान का विकास होता है। यह विचार प्रवर्तक सुकन मुनि ने प्रवचन के दौरान व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि विनय धर्म का मूल आधार है। यदि मनुष्य के जीवन में विनम्रता और संस्कार नहीं हैं तो ज्ञान का कोई महत्व नहीं रह जाता। विनय व्यक्ति को संयम, सहनशीलता और सदाचार की ओर ले जाता है।

प्रवर्तक सुकन मुनि ने कहा कि आज के समय में भौतिक सुख-सुविधाओं की होड़ में लोग संस्कार और विनम्रता को भूलते जा रहे हैं, जबकि वास्तविक सुख और शांति धर्म, संयम और विनय में ही निहित है।

उन्होंने कहा कि जीवन में अहंकार का त्याग कर विनम्रता अपनाने से व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है और समाज में भी उसका सम्मान बढ़ता है। विनय ही वह गुण है जो व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और उन्होंने मुनि श्री के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना। इस अवसर पर धर्म, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।

श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे प्रवचनों से जीवन को सही दिशा मिलती है और मन में सकारात्मकता का संचार होता है। कार्यक्रम के अंत में धर्म लाभ लेने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।