Makar Sankranti 2024 मकर संक्रांति पर जयपुर जमकर उड़ाई जाती है पतंग, इस बार दो दिन घरों की छतों पर होगा 'वो काटा' वो मारा का शोर
मकर संक्रांति का त्योहार हर वर्ष 14 जनवरी को आता है लेकिन इस बार तिथियों के अनुसार मकर संक्रांति 15 जनवरी को आएगी। जयपुर जिला प्रशासन ने मकर सक्रांति की छुट्टी भी इस बार 15 जनवरी को घोषित की है। जिला कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित ने सोमवार 8 दिसंबर को आदेश जारी करते हुए मकर संक्रांति का अवकाश सोमवार 15 जनवरी 2024 को घोषित किया है। ऐसे में रविवार के अवकाश के बाद सोमवार का भी अवकाश रहेगा। साथ ही शीतला अष्टमी के दिन जयपुर के पास चाकसू में शीतला माता का मेला भरता है। इस मेले के अवसर पर भी हर साल अवकाश घोषित किया जाता है। इस कारण जिला प्रशासन ने 1 अप्रैल 2024 को शीतला अष्टमी का अवकाश घोषित किया है।
राजस्थान के अलग अलग शहरों में अलग अलग अवसरों पर पतंगबाजी होती है। जयपुर में मकर सक्रांति के दिन पतंगबाजी होती है। जिला प्रशासन द्वारा सोमवार 15 जनवरी को अवकाश घोषित किए जाने पर जयपुर के लोगों को डबल खुशी मिल गई है। जयपुर के लोग अब 14 जनवरी रविवार और 15 जनवरी सोमवार को लगातार दो दिन तक अवकाश होने की वजह से पतंगबाजी का लुत्फ उठा सकेंगे। मकर संक्रांति के अवसर पर दान पुण्य भी किया जाता है। दान पुण्य के लिए 15 जनवरी का दिन इस बार शुभ माना गया है। शहर के काइट फेस्टिवल की शान रहे एक साथ 100 पतंगे उड़ाने वाले बाबू खां का कमाल इस मकर संक्रांति पर भी नहीं देखने को मिला। साल 2014 में हुए उनके निधन के बाद से उनके पुत्र ये परंपरा निभा रहे थे मगर इस बार पर्यटन विभाग की ओर से कोई रूचि नहीं दिखाए जाने के चलते 100 पतंगों को एकसाथ उड़ाए जाने का कमाल कोई नहीं देख पाया।

राजस्थान के अलग अलग शहरों में अलग अलग अवसरों पर पतंगबाजी होती है। जयपुर में मकर सक्रांति के दिन पतंगबाजी होती है। जिला प्रशासन द्वारा सोमवार 15 जनवरी को अवकाश घोषित किए जाने पर जयपुर के लोगों को डबल खुशी मिल गई है। जयपुर के लोग अब 14 जनवरी रविवार और 15 जनवरी सोमवार को लगातार दो दिन तक अवकाश होने की वजह से पतंगबाजी का लुत्फ उठा सकेंगे। मकर संक्रांति के अवसर पर दान पुण्य भी किया जाता है। दान पुण्य के लिए 15 जनवरी का दिन इस बार शुभ माना गया है।

दुनियाभर में प्रसिद्ध है जयपुर की पतंगबाजीजयपुर की पतंगबाजी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां राजघराने के समय से पतंगबाजी होती आई है। राजपरिवार के सदस्य जयपुर के लोगों के साथ पतंगबाजी करते रहे हैं। राज्य सरकार के पर्यटन विभाग की ओर से पतंगबाजी महोत्सव का आयोजन भी किया जाता है जिसमें कई विदेशी सैलानी भी हिस्सा लेते रहे हैं। साथ ही जयपुर के चौगान स्टेडियम और जल महल की पाल पर पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं होती है। दो दिन का अवकाश होने के कारण लोगों की खुशी दोहरी हो गई है।

शहर के काइट फेस्टिवल की शान रहे एक साथ 100 पतंगे उड़ाने वाले बाबू खां का कमाल इस मकर संक्रांति पर भी नहीं देखने को मिला। साल 2014 में हुए उनके निधन के बाद से उनके पुत्र ये परंपरा निभा रहे थे मगर इस बार पर्यटन विभाग की ओर से कोई रूचि नहीं दिखाए जाने के चलते 100 पतंगों को एकसाथ उड़ाए जाने का कमाल कोई नहीं देख पाया।

पेच काटते ही विदेशी भी चिल्लाए 'वो काटा'
संक्रांति पर पतंगबाजी की धूम में विदेशी सैलानी भी खूब घुल मिल गए और यहां की परंपरा और संस्कृति की डोर में अपने आप को भी आसानी से पिरो लिया। विदेशियों ने पतंगबाजी के दौरान जब जब पेच लड़ाकर दूसरों की पतंग काटी तो उसके बाद यहां की जुबान में 'वो काटा, वो मारा' भी चिल्लाए।

खेल ख्यालों से भी हुआ मनोरंजन
जलमहल की पाल पर आयोजित जयपुर काइट फेस्टिवल में सैलानियों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी रखी गई थी। वहीं लोक कलाकारों ने ख्याल दिखाकर विदेशियों का खूब मनोरंजन किया।
लोक कलाकारों ने विशेष प्रस्तुति

काइट फेस्टिवल में राजस्थान के लोक कलाकारों की ओर से विशेष प्रस्तुति दी गई जिनमें कालबेलिया डांस, मयूर डांस आदि शामिल था। राजस्थान के पारंपरिक नृत्य देखकर विदेशी मेहमान भी खुद को रोक नहीं पाए और कलाकारों के बीच पहुंचकर झूमने लगे।
विदेशियों को ऐसे एंजॉय करते देख लोकल ट्यूरिस्ट भी झूम उठे विदेशी मेहमानों को एंजॉय करते देखने के बाद लोकल ट्यूरिस्ट भी खुद को रोक नहीं पाए और उनके साथ साथ झूमने के लिए जलमहल पहुंच गए। शाम तक देखते ही देखते माहौल काफी आकर्षक हो गया जिससे त्यौहार में चार चांद लग गए।
विभिन्न रंगों में रंगे नजर आए लोग
काइट फेस्टिवल के मौके पर विभिन्न रंगों में बहरूपिए नजर आया कोई भगवान बना तो कोई वन्यजीव। इन्हें देखकर विदेशियों के कैमरे अपने आप ही बैग से बाहर निकल आए।
