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Pratapgarh नगर परिषद की गौशाला में फैली अव्यवस्था, चारे-पानी के अभाव में बेहाल मवेशी

 

प्रतापगढ़ न्यूज़ डेस्क, प्रतापगढ़ नगर परिषद द्वारा धरियावद रोड पर संचालित गौशाला में वर्ष 2020 से मवेशियों को समय पर चारा पानी नहीं मिलने से दयनीय स्थिति उत्पन्न हो रही है. यह गौशाला पहले भी सुर्खियों में रही है। गौशाला में अव्यवस्था को लेकर पहले भी गोभक्तों ने यहां विरोध जताया था। जिससे कुछ समय के लिए नगर परिषद ने अपनी व्यवस्था में सुधार किया, लेकिन समय बीतने के बाद स्थिति जस की तस बनी रही। बुधवार की दोपहर जब गौशाला पहुंचे और वहां की व्यवस्था जानी तो हकीकत कुछ और निकली. गौशाला में मवेशियों के लिए हरा चारा तक नहीं था। मवेशियों के लिए एक गोदाम में रखा हुआ सूखा चारा भी कांटेदार डंठल की तरह होता था, जिसे खाने पर मवेशियों के जबड़े छिल जाते थे। नगर परिषद द्वारा संचालित गौशाला में मवेशी चारे की तलाश में भटकते देखे गए। गोशाला में लंबे समय से मवेशियों का इलाज नहीं होने से कई मवेशी बीमार नजर आए। ऐसे में गौशाला के जिम्मेदार लोग पूरी तरह से अंजान बने हुए हैं। गौरतलब है कि इस गौशाला में करीब 100 गायें हैं, जिनके खाने-पीने की जिम्मेदारी नगर परिषद की है। कई गायों को खाने के लिए चारा नहीं मिलने के कारण वह गौशाला के अंदर भूख से बिलखता नजर आया। नगर परिषद इस गौशाला को 2 साल से चला रही है। इस गौशाला में साल भर से मवेशियों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। शिकायत करने के बाद कुछ सुधार हुआ है। इसके बाद स्थिति जस की तस हो जाती है। नगर परिषद के अधिकारियों ने बताया कि परिषद के टेंडर में गौशाला में मवेशियों के लिए हरे चारे की कोई शर्त नहीं है. ऐसे में नगर परिषद द्वारा मवेशियों को हरा चारा नहीं खिलाया जाता है। मवेशियों को सूखा चारा ही दिया जाता है। सुबह दर्शन करने वालों और कई भामाशाहों को हरा चारा डाला जाता है।

नगर परिषद की ओर से गौशाला में मवेशियों के चारे के लिए पद्मावती इलेक्ट्रिकल्स कंपनी के बहादुर सालगिया को पांच लाख रुपये सालाना का टेंडर दिया गया है. गेहूं की भूसी और सोयाबीन का सूखा चारा टेंडर में डालना निर्धारित है, लेकिन सच्चाई यह है कि मवेशियों को गेहूं की भूसी उपलब्ध नहीं हो पाती है. ऐसे में मवेशी सूखे डंठल चबाने को विवश होकर दुबले-पतले हो रहे हैं। नगर परिषद में स्थिति यह है कि ठेकेदार कौन सा चारा डाल रहा है इसकी मॉनिटरिंग नहीं हो रही है। ठेकेदार तौल की रसीद नगर परिषद के अधिकारियों को देता है, जिसमें पता ही नहीं चलता कि चारा गेहूं का चोकर है या सोयाबीन। लोगों ने कहा कि गौशाला में मवेशियों की देखभाल करने वाले अंबालाल से लेकर नगर परिषद के अधिकारियों तक में ठेकेदार की गहरी पैठ है. ऐसे में यह चेन सिस्टम ही मवेशियों का निवाला निगल रहा है।  दो साल से कोई भी गौशाला का टेंडर लेने को तैयार नहीं हुआ। मवेशियों की हालत देखकर मैंने टेंडर ले लिया। गौशाला से मांग के अनुसार चारा भेजा जाता है। इसमें गेहूं, मक्का, अलसी, सोयाबीन के सूखे चारे के अलावा मिश्रित सूखा चारा भी भेजा जाता है। बहादुर सालगिया, ठेकेदार मवेशियों के चारे से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। आज ही इसकी जांच कराने के लिए कर्मियों को भेजूंगा। पशुओं के लिए सूखे कंटीले चारे के स्थान पर गेहूं या अन्य भूसे की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। ठेकेदार को भी प्रतिबंधित किया जाएगा और अन्य व्यवस्थाओं में भी सुधार किया जाएगा।