Pali दुनिया का पहला 'ओम' मंदिर पर तूफान और भूकंप भी बेअसर, 13 हिस्सों में बना मंदिर
पाली न्यूज़ डेस्क, इसे बनाने वाले सिविल इंजीनियर और आर्किटेक्ट स्वामी योगेश पुरी का कहना है कि मंदिर 500 सालों तक सुरक्षित रहेगा। भूकंप या प्राकृतिक आपदाओं का भी भवन पर कोई असर नहीं होगा। उन्होंने कहा- मंदिर को 13 अलग-अलग भागों में बनाया गया है। यही इसकी विशेषता है, ड्रोन से देखने पर ये सभी भाग ॐ आकार के नजर आते हैं। मंदिर का पूरा भवन 1990 खम्बों पर खड़ा है। आधा किमी एरिया में फैले इस अद्भुत ॐ आकार के मंदिर के निर्माण में 28 साल का वक्त लगा।
आइए मंदिर के आर्किटेक्ट स्वामी योगेश पुरी से जानते हैं 28 सालों से चल रहे मंदिर के निर्माण का सफर-
भवन के आगे प्राकृतिक आपदा भी बेअसर
स्वामी योगेश पुरी कहते है- मंदिर निर्माण इतना आसान नहीं था। स्वामी महेश्वरानंद के भवन बनाने के सपने को साकार करने के लिए एक पूरा प्लान बनाना जरूरी था। बता दें कि मूल रूप से स्लोवाकिया के रहने वाले योगेश पुरी पिछले करीब 30 साल से स्वामी महेश्वरानंद के साथ है। वे कहते हैं- दूर से दिखने में यह भवन एक लगता है, लेकिन असल में यह 13 भागों में बंटा है। 13 अलग-अलग भवन हैं जिन्हें ॐ के आकार में बनाया गया है। यही खासियत है कि ये मंदिर 500 सालों तक सुरक्षित रहेगा। भूकंप या बड़ी से बड़ी प्राकृतिक आपदा भी इसके आगे बेअसर है। स्वामी योगेश पुरी ने बताया- हमारे लिए सबसे पहले मजबूती जरूरी थी। विचार यह था कि मंदिर ऐसा अद्भुत बने जो अगले 400 से 500 सालों तक सुरक्षित रहे। श्रद्धालुओं की पीढ़ियां इसे देखने आए और उनकी आने वाली पीढ़ियों को भी यहां आने को प्रेरित करें।
भवन का सबसे ऊंचा हिस्सा 42 मीटर ऊंचा सूर्य मंदिर।
200 KM प्रति घंटे की स्पीड से चलने वाली तेज हवाएं भी बेअसर।
आरसीसी बनाने में M-30 से M-40 कंक्रीट का उपयोग किया गया।
छत की RCC की चौड़ाई 8 इंच, इससे भवन को मिलेगी मजबूती।
500 सालों तक सुरक्षित रहेगा भूकंपरोधी भवन।
बेसमेंट को वाटरप्रूफ बनाया गया है। ताकि पानी ऊपर भवन तक नहीं पहुंचे।
200 नक्शों पर साल भर चली रिसर्च
सालभर में 200 नक्शे बनाए, महीनों चली चर्चा
स्वामी योगेश पुरी ने बताया- जब मंदिर बनाने का विचार आया तो मेरे दिमाग में इसके लेकर कोई प्लानिंग नहीं थी। ना ही मुझे कोई आईडिया था कि इंडिया में मंदिर को किस तरह डिजाइन किया जाता है। इसके लिए बैंगलोर के आर्किटेक्ट चेतनराज सोमपुरा की मदद ली और उन्होंने ही मंदिर का नक्शा और डिजाइन बनाया। उन्होंने ॐ आकार के भवन में हॉल, कमरे की डिजाइन की। वे कहते हैं- हमनें सालभर में करीब 200 नक्शे बनाए, लेकिन एक भी नक्शा अद्भुत मंदिर के पैमाने पर खरा नहीं उतर रहा था। इसके बाद हम दोनों ने मिलकर एक नक्शे को फाइनल किया और उस पर 3-4 महीने दिन-रात काम किया। तब जाकर एक साकार स्वरुप निकल कर सामने आया। इस पूरे भवन को बनाने में ॐ आश्रम के सहायक अभियंता निरंजनपुरी, स्वामी सुदर्शनपुरी और क्रियाशक्ति का भी योगदान रहा।
बेसमेंट भी है खास
पुरी ने बताया कि इसका बेसमेंट भी खास मकसद से तैयार किया गया है। इसका उपयोग योग, साधना, मेडिटेशन और प्रार्थना के लिए किया जाएगा। उन्होंने बताया- बेसमेंट प्राकृतिक रूप से वातानुकूलित होते हैं। यहां न ज्यादा गर्मी ना सर्दी रहती है। ऐसे में इसका उपयोग योग-साधना के लिए किया जाएगा। वहीं हाईवे से गुजरने वाले वाहनों और मंदिर में मौजूद लोगों की आवाजें भी बेसमेंट तक नहीं पहुंच पाएंगीं। ऐसे में, यहां शांति चाहने वालों के लिए खास इंतजाम हैं। पुरी के अनुसार, मंदिर के बेसमेंट को वाटरप्रूफ बनाया गया है। यहां पानी आया तब भी दीवारों को कोई नुकसान नहीं पाएगा। भवन के बेसमेंट में स्वामी महेश्वरानंद के गुरुजी स्वामी माधवानंद पुरी की सप्त ऋर्षियों के साथ बनाई गई मूर्ति आकर्षण का केन्द्र है।
ब्लैक स्टोन से बनाए गए द्वादश ज्योतिर्लिंग
इसके साथ ही इस भवन का मुख्य आकर्षण ब्लैक स्टोन से बनाए गए द्वादश ज्योतिर्लिंग हैं। इनके आस-पास 1008 भगवान शिव की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इसके साथ ही सूर्य मंदिर भी आकर्षण का केंद्र है। जो इस भवन का सबसे ऊंचा हिस्सा है। 42 मीटर ऊंचे इस सूर्य मंदिर में 12 मंदिर है और 2.5 लाख लीटर भराव क्षमता वाली टंकी बनी हुई है। इसके साथ ही द्वादश ज्योतिलिंग के सामने स्थित ब्लैक स्टोन से बना नंदी भी आकर्षण का केंद्र है।
भवन निर्माण की फैक्ट फाइल-
सागवान की लकड़ी के 1010 दरवाजे और 1002 खिड़कियां
818 PVC दरवाजे और खिड़कियां
निर्माण में 1650 टन सरिए का उपयोग
मंदिर भवन में लगाई गई हैं 27 लाख ईटें
4 लाख स्पेशल ब्लॉक दीवारों में
निर्माण में 15 हजार टन बजरी और 8200 टन सीमेंट उपयोग
2 लाख फीट ग्रेनाइट-मार्बल और 1.5 लाख फीट की टाइल्स
26 हजार टन जोधपुरी पत्थर (नींव, दीवारों में)
42 हजार टन भरतपुरी पत्थर (घड़ाई के लिए)
भवन में 1 लाख लाइट्स और 400 AC
500 KV का सोलर प्लांट लगेगा
मंदिर के पिलर भी हैं खास
इस भवन के मध्य भाग में भगवान शिव का मंदिर बनाया गया है। जिसके पिलरों पर भगवान हनुमान, माता लक्ष्मी, सरस्वती सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं उकेरी गई है। यह पूरा भवन गुलाबी पत्थरों से बनाया गया है। प्राचीन शास्त्रोक्त हस्तकला से परिपूर्ण दक्षिण भारतीय नागर शैली और स्थापत्य, वास्तुकला, शिल्पकला की उत्कृष्ट कलाकृति है यह भवन। बता दें कि मंदिर का शिलान्यास 23 जनवरी 1995 को हुआ था।
दुनियाभर के लोग कर सकेंगे मेडिटेशन
ॐ श्री अलखपुरी सिद्धपीठ परम्परा पीठाधीश्वर स्वामी महेश्वरानंद पुरी के उत्तराधिकारी स्वामी अवतारपुरी और महामंडलेश्वर फूलगिरी ने बताया- स्वामी महेश्वरानंद पुरी इसे योग यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित होता देखना चाहते हैं। इसलिए इस भवन के बेसमेंट को योग, साधना और मेडिटेशन के लिए बनाया गया है। उनका सपना है दुनिया भर के लोग यहां योग, मेडिटेशन करने और सीखने आए।
250 एकड़ में फैला है मंदिर
250 एकड़ में फैले मंदिर के भवन का पूर्व से पश्चिम तक का क्षेत्रफल 185 मीटर और उत्तर से दक्षिण में 252 मीटर है।
इस भवन की ऊंचाई 38.5 मीटर है।
मंदिर का सबसे ऊंचा हिस्सा सूर्य मंदिर का है। जिसकी ऊंचाई 42 मीटर है।
पूरा भवन 1990 खंभों पर टिका है।
भवन में 108 कमरे हैं जहां 10 हजार लोग ठहर सकेंगे।
इस भवन में 55 CCTV कैमरे भी लगाए जाएंगे। एक कंट्रोल रूम भी बनाया जाएगा।
राज्य के इन कारीगरों ने किया काम
मंदिर को बनाने में मार्बल और टाइल्स का काम बीकानेर के बाबूलाल, भोमाराम और उनकी टीम ने किया। वहीं RCC का काम रतनगढ़ के उगमसिंह रावत और जयपुर के छोटू सिंह डांडी ने किया है। लकड़ी के दरवाजे और खिड़कियां बनाने का काम बीकानेर के बींजाराम जांगिड़ ने किया। भवन में पेंटिंग का काम पाली के बुधराज प्रजापत और उनकी टीम ने किया। बता दें कि मंदिर में 6 बड़े हॉल, 10 ऑफिस, 1 लाइब्रेरी, 1 डिजिटल लाइब्रेरी, स्वागत कक्ष, मीटिंग हॉल, 1 रसोई घर, स्वामी महेश्वरानंद पुरी का आवास, उत्तराधिकारी कतारपुरी का आवास और 2 BHK के 2 गेस्ट हाऊस भी बनाए गए हैं।
