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हंगामे के बीच राज्यसभा में पेश हुआ राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक

नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। को राज्यसभा में शुक्रवार को राष्ट्र- गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया गया। यह संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए है। विधेयक के अनुसार राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के अपमान को दंडनीय अपराध माना जाएगा। यह विधेयक गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा के समक्ष रखा। विधेयक राज्यसभा के समक्ष विचार करने और पारित करने के लिए पेश किया गया है।
 

नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। को राज्यसभा में शुक्रवार को राष्ट्र- गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया गया। यह संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए है। विधेयक के अनुसार राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के अपमान को दंडनीय अपराध माना जाएगा। यह विधेयक गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा के समक्ष रखा। विधेयक राज्यसभा के समक्ष विचार करने और पारित करने के लिए पेश किया गया है।

विधेयक पेश करने के दौरान सदन में जबरदस्त हंगामा रहा। इसी हंगामे के बीच गृह राज्यमंत्री ने यह विधेयक सदन में प्रस्तुत किया। विधेयक प्रस्तुत करने के कुछ देर बाद ही हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही को सोमवार 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया गया। यह विधेयक राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम राष्ट्रगान 'जन गण मन' जैसा वैधानिक दर्जा व सुरक्षा प्रदान करता है। यानी यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय गीत वंदे वन्देमातरम् का अपमान करता है तो उसके खिलाफ कड़ी करवाई की जा सकती है और कानून के अंतर्गत उसे दंडित किया जा सकता है।

विधेयक सदन में पेश किए जाने पर उपसभापति ने बताया कि विधेयक को पेश किए जाने का भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सदस्यों डॉ. जॉन ब्रिटास, ए. ए. रहीम, डॉ. वी. शिवदासन तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के सदस्य संतोष कुमार पी. की ओर से विरोध संबंधी नोटिस प्राप्त हुए हैं। इसके बाद सभापति ने विरोध का नोटिस देने वाले सदस्यों को अपनी बात रखने की अनुमति दी।

विधेयक का विरोध करते हुए डॉ. जॉन ब्रिटास ने कई सवाल उठाए। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सदस्य डॉ. जॉन ब्रिटास ने राष्ट्रगौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 का विरोध करते हुए कहा कि संसद सामान्य कानून के जरिए किसी संवैधानिक घोषणा को दोबारा नहीं लिख सकती। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पूरी तरह डॉ. राजेंद्र प्रसाद के वक्तव्य पर आधारित है, लेकिन उसमें सबसे महत्वपूर्ण वाक्य और उसका संवैधानिक संदर्भ शामिल नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि वह वक्तव्य न तो संविधान का प्रावधान था, न कोई प्रस्ताव और न ही संविधान सभा का निर्णय। ऐसे में संसद 76 वर्ष बाद राष्ट्रपति के एक वक्तव्य को संवैधानिक दर्जा नहीं दे सकती। ब्रिटास ने कहा कि संविधान सभा ने करीब तीन वर्षों तक गहन विचार-विमर्श के बाद जानबूझकर राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान को समान संवैधानिक दर्जा नहीं दिया। यदि संविधान निर्माताओं की ऐसी मंशा होती तो वे इसका स्पष्ट प्रावधान करते।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के कानून से देशभक्ति और राष्ट्रवाद पैदा नहीं किया जा सकता तथा सरकार इस विधेयक के माध्यम से समाज का ध्रुवीकरण करना चाहती है।

--आईएएनएस

जीसीबी/पीएम