Aapka Rajasthan

मानसून में बुखार को न करें नजरअंदाज, पहले 24 घंटे अहम केजीएमयू ने संचारी रोगों से बचाव का दिया संदेश

लखनऊ, 1 अगस्त (आईएएनएस)। मानसून के मौसम में डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और अन्य संचारी रोगों के बढ़ते खतरे के बीच किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने आमजन से बुखार को हल्के में न लेने और शुरुआती 24 घंटे के भीतर चिकित्सकीय जांच कराने की अपील की है। विभाग ने स्पष्ट किया कि डेंगू फैलाने वाला एडीज़ मच्छर गंदगी में नहीं, बल्कि साफ और रुके हुए पानी में पनपता है। ऐसे में सप्ताह में केवल 10 मिनट घर और आसपास जमा पानी की जांच कर उसे हटाने से संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
 

लखनऊ, 1 अगस्त (आईएएनएस)। मानसून के मौसम में डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और अन्य संचारी रोगों के बढ़ते खतरे के बीच किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने आमजन से बुखार को हल्के में न लेने और शुरुआती 24 घंटे के भीतर चिकित्सकीय जांच कराने की अपील की है। विभाग ने स्पष्ट किया कि डेंगू फैलाने वाला एडीज़ मच्छर गंदगी में नहीं, बल्कि साफ और रुके हुए पानी में पनपता है। ऐसे में सप्ताह में केवल 10 मिनट घर और आसपास जमा पानी की जांच कर उसे हटाने से संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश शासन के विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के तहत माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने "मानसून सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी – संचारी रोगों से बचाव हमारी प्राथमिकता" विषय पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विभागाध्यक्ष प्रो. विमला वेंकटेश ने किया। उन्होंने कहा कि संचारी रोगों की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग यह मानते हैं कि डेंगू का मच्छर गंदे पानी में पनपता है, जबकि वास्तविकता यह है कि एडीज मच्छर साफ और रुके हुए पानी में तेजी से विकसित होता है।

उन्होंने लोगों से कूलर, गमलों, बाल्टियों, ओवरहेड टैंकों, पुराने टायरों और अन्य जल-संग्रहण स्थलों की नियमित जांच कर पानी खाली करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सप्ताह में केवल 10 मिनट का निरीक्षण मच्छरों के प्रजनन को रोकने और पूरे परिवार को डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। कार्यक्रम के दौरान एमडी रेजिडेंट्स ने संचारी रोगों की रोकथाम पर पोस्टर प्रस्तुत किए। इसके अलावा हाथों की स्वच्छता, ओआरएस घोल तैयार करने की विधि, मच्छरों के प्रजनन स्थलों की रोकथाम और मच्छररोधी उपायों का लाइव प्रदर्शन किया गया।

इंटरएक्टिव क्विज, "मिथक बनाम तथ्य" सत्र और विशेषज्ञ परिचर्चा के माध्यम से लोगों की भ्रांतियों को दूर करते हुए वैज्ञानिक जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने मानसून के दौरान होने वाले संक्रमणों की समय रहते पहचान, चिकित्सकीय परामर्श, एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और परिवार व समुदाय स्तर पर अपनाए जाने वाले बचाव के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की। अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. शीतल वर्मा ने कहा कि मानसून में बुखार के पहले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

उन्होंने लोगों से लगातार रहने वाले बुखार को नजरअंदाज न करने और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने से बचने की अपील की। उन्होंने पर्याप्त तरल पदार्थ लेने, अनावश्यक एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से बचने और समय पर जांच कराने की सलाह दी। डॉ. वर्मा ने कहा कि समय पर जांच कराने से डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, लेप्टोस्पायरोसिस और वायरल संक्रमणों के बीच सही पहचान संभव होती है, जिससे उचित उपचार समय पर शुरू किया जा सकता है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

कार्यक्रम में प्रो. आर.के. कल्याण, प्रो. प्रशांत गुप्ता, डॉ. पारुल जैन, डॉ. सुरुचि शुक्ला, डॉ. वसुधा केसरवानी, डॉ. सर्वोदय त्रिपाठी सहित विभाग के संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, छात्र-छात्राएं, वैज्ञानिक, शोधार्थी और कर्मचारी मौजूद रहे। इस अवसर पर विभाग ने लोगों से अपील की कि वे घर और आसपास पानी जमा न होने दें, स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित भोजन का उपयोग करें, नियमित रूप से हाथ धोएं, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं तथा बुखार या अन्य चेतावनी संकेत दिखाई देने पर बिना देरी चिकित्सकीय सलाह लें।

--आईएएनएस

विकेटी/पीएम