युवा धर्म संसद आत्मबोध का मंच है : आनंद रंगनाथन; कुलपति तिवारी बोले- अब गांवों की ओर लौटने का समय
उज्जैन, 19 सितंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में शनिवार को आयोजित युवा धर्म संसद में वैज्ञानिक और लेखक आनंद रंगनाथन ने स्वामी मिथिलेश के ज्ञान को नमन करते हुए इसे अब तक का सबसे सार्थक आयोजन बताया। वहीं, एमसीयू के कुलपति विजय मनोहर तिवारी ने गांवों से शहरों की ओर हुए पलायन पर चिंता जताते हुए रिवर्स माइग्रेशन को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया।
वैज्ञानिक, लेखक और स्तंभकार प्रो. आनंद रंगनाथन ने कहा, "जब मैं आया था और धर्म संसद में बात की, और अब जब कार्यक्रम खत्म हुआ है, तो मुझे लगता है कि मेरे पास सिर्फ 30 फीसदी ज्ञान था। बाकी का 70 फीसदी ज्ञान स्वामी मिथिलेश जी ने दिया है। उन्होंने जो कुछ भी बताया, मैं ईमानदारी से कहूंगा कि मैं अपने आप को बहुत छोटा महसूस कर रहा हूं। उनका जो मार्गदर्शन है, जिस गहराई में जाकर उन्होंने हर चीज का उल्लेख किया, वह अद्भुत है। मैंने जब टॉपिक देखा, तो मैंने ऋषि को ऋषि समझा, कृषि को कृषि समझा, लेकिन उन्होंने जो समझाया, उसका असली मतलब क्या है, उन शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया गया है, यह उन्होंने बताया। जो ज्ञान उन्होंने दिया है, उसे सुनकर मैं वास्तव में स्तब्ध हूं, सच कहूं तो मेरे लिए यहां आना ही सार्थक हो गया, बाकी लोगों के बारे में मुझे नहीं पता।"
उन्होंने कहा, "बहुत सारे ऐसे कार्यक्रम होते हैं, हर हफ्ते एक लिटरेचर फेस्टिवल होता है। इस संसद का असली मतलब क्या है, वो स्वामी जी ने समझाया। सिर्फ आना और भाषण देना या 15 मिनट तक बोलना, भले ही वह बहुत अच्छा ज्ञान हो, वह मायने नहीं रखता। यह पहली बार है जब मुझे लग रहा है कि मैंने वास्तव में किसी कार्यक्रम में भाग लिया है। ईमानदारी से कहूं तो एक वक्ता के तौर पर नहीं, बल्कि एक प्रतिभागी के तौर पर मैं आज सबसे ज्यादा खुद को धन्य महसूस कर रहा हूं। मुझे लगता है कि जागरूकता हमेशा नीचे से ऊपर की ओर आती है, लेकिन कार्रवाई ऊपर से नीचे की ओर आती है। आप युवाओं को कितना भी जागरूक कर लीजिए, युवाओं को सब पता है कि समस्या क्या है और समाधान क्या है, लेकिन जब तक जिन्हें युवाओं ने चुना है, वे समाधान नहीं देंगे, तब तक हम भटकते रहेंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "मुझे इस बात का डर है कि जब तक आप 30 करोड़ किसानों को उत्पादक नहीं बनाएंगे, उन्हें सिर्फ वोट बैंक बनाकर रखा जाएगा, तब तक कोई समाधान नहीं निकल सकता। आप युवाओं को कितना भी जागरूक कर लें, इस समस्या का हल नहीं निकल सकता।"
एमसीयू के कुलपति विजय मनोहर तिवारी ने कहा, "मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे दूसरी बार युवा धर्म संसद में आने का मौका मिला है। पहली बार मैं पिछली धर्म संसद में कांचीपुरम में शामिल हुआ था। आज का विषय ऋषि और कृषि से जुड़ा हुआ है, जो बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए जरूरी है क्योंकि पिछले 80 वर्षों में, भारत की स्वतंत्रता के बाद गांवों से शहरों की ओर जो एकतरफा पलायन हुआ है, उसने हमारे गांवों को पूरी तरह से वीरान कर दिया है। गांवों में अब कोई नहीं बचा है और वहां से जो आबादी एकतरफा बड़े शहरों में गई है, उससे शहरों का जीवन नरक बन गया है। शहर तबाह हो रहे हैं और रहने लायक नहीं बचे हैं।"
--आईएएनएस
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