योग में जल्दबाजी नहीं, नियमित अभ्यास है जरूरी, आयुष मंत्रालय ने बताए सिद्धांत
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को फिट और स्वस्थ रखने के लिए बड़ी संख्या में लोग योग करते हैं। कोई वजन कम करने के लिए योग करता है, तो कोई तनाव दूर करने और मानसिक शांति पाने के लिए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि योग का मतलब सिर्फ मुश्किल आसन करना या शरीर को अलग-अलग मुद्राओं में मोड़ना नहीं है? योग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें नियमित अभ्यास, धैर्य, शरीर के प्रति जागरूकता और अपनी क्षमता को समझना बेहद जरूरी है।
आयुष मंत्रालय ने योग अभ्यास को लेकर कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांत साझा किए हैं। मंत्रालय के मुताबिक, योग कोई प्रतियोगिता नहीं है, जिसमें आपको दूसरों से आगे निकलना हो। इसका असली उद्देश्य अपने शरीर और मन को समझना और उनके बीच बेहतर तालमेल बनाना है।
योग का पूरा लाभ तभी मिलता है, जब आप इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं। कभी-कभार योग करने या एक ही दिन में घंटों अभ्यास करने से बेहतर है कि आप रोजाना अपनी सुविधा के अनुसार कुछ समय तक योग करें। नियमित और लगातार अभ्यास योग का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। शुरुआत में आप आसान आसनों से अभ्यास कर सकते हैं और धीरे-धीरे अपने अभ्यास का समय बढ़ा सकते हैं।
कई बार लोग दूसरों को देखकर मुश्किल योगासन करने की कोशिश करने लगते हैं। सोशल मीडिया पर किसी को कठिन आसन करते देखकर उसे दोहराना भी नुकसानदायक हो सकता है। हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है और उसकी क्षमता भी अलग होती है। इसलिए योग करते समय अपनी शारीरिक स्थिति, जरूरत और क्षमता को समझना जरूरी है। किसी भी आसन को जबरदस्ती करने या शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने से बचें।
योग करते समय सिर्फ आसन पूरा करने पर ध्यान न दें, बल्कि यह भी समझें कि आपका शरीर कैसा महसूस कर रहा है। सांसों की गति, शरीर में होने वाला खिंचाव और मन की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है। अगर किसी आसन को करते समय दर्द या असहजता महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज न करें। शरीर के संकेतों को समझना योग अभ्यास का अहम हिस्सा है।
अक्सर लोग योग को केवल शारीरिक व्यायाम समझ लेते हैं, जबकि इसका दायरा इससे कहीं ज्यादा बड़ा है। योग में यम और नियमों को भी विशेष महत्व दिया गया है। ये जीवन को सही दिशा देने वाले नैतिक और व्यक्तिगत अनुशासन के सिद्धांत हैं। यम हमें दूसरों के प्रति सही व्यवहार करना सिखाते हैं, जबकि नियम आत्म-अनुशासन, स्वच्छता और संतोष जैसे गुणों को अपनाने की प्रेरणा देते हैं।
--आईएएनएस
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