विवादित टिप्पणी करने वालों के खिलाफ जेएनयू प्रशासन कार्रवाई करे: आर्यन मान
नई दिल्ली, 7 जनवरी (आईएएनएस)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में लगाए गए विवादित नारे पर दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के प्रेसिडेंट आर्यन मान ने कड़ी आलोचना की। उन्होंने जेएनयू प्रशासन से मांग की है कि विवादित टिप्पणी करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
नई दिल्ली में डूसू अध्यक्ष आर्यन मान ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि एक बार फिर लेफ्टिस्ट्स ने जेएनयू में देश-विरोधी नारे लगाए हैं, जोकि बहुत ही शर्मनाक है। प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह, जिन्हें देश के युवाओं ने चुना है, उनके बारे में अपशब्द कहे जा रहे हैं। संघ और एबीवीपी के लिए भी गलत शब्दों का प्रयोग किया गया। संघ और एबीवीपी हमेशा देश के लिए खड़ा रहा है। एबीवीपी हर कॉलेज में यही संदेश देती है कि युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सहयोग करना चाहिए। दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की बेल याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया, जिसका हम स्वागत करते हैं। ऐसे में जब दोनों को जमानत नहीं मिली तो जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाए गए। मैं जेएनयू प्रशासन से मांग करता हूं कि चिन्हित कर ऐसे छात्रों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
डूसू अध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि मैं जेएनयू में हुई हाल की घटना की कड़ी निंदा करता हूं। कैंपस को देश विरोधी साजिशों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं बनने दिया जा सकता। विरोध संवैधानिक दायरे में ही होना चाहिए। मैं भारत के संविधान और न्यायपालिका के अधिकार के साथ मजबूती से खड़ा हूं। यूनिवर्सिटी शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के लिए होती है, न कि अराजकता को बढ़ावा देने के लिए। अभिव्यक्ति की आजादी अशांति भड़काने या हमारे देश की संप्रभुता को कमजोर करने का अधिकार नहीं देती। छात्र राजनीति में जिम्मेदारी और अनुशासन होना चाहिए। कैंपस को अराजकता के हवाले नहीं किया जा सकता।
एबीवीपी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि जेएनयू परिसर में वामपंथी गुटों द्वारा हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बार फिर वही पुरानी देशविरोधी मानसिकता सामने आई, जो समय-समय पर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा को ठेस पहुंचाती रही है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रविरोधी तथा हिंसात्मक गतिविधियों में संलिप्त उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद कुछ वामपंथी और तथाकथित ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ से जुड़े तत्वों ने न्यायिक निर्णय का सम्मान करने के बजाय खुलेआम उग्र नारेबाजी की। अभाविप जेएनयू ईकाई ऐसे हर देशविरोधी कृत्य की कड़ी निंदा करती है और इसे छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि सुनियोजित अराजकता मानती है।
--आईएएनएस
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