विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार, रोकेंगे तो हर सड़क बनेगी जंतर-मंतर : कासिम रसूल इलियास
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद के पिता कासिम रसूल इलियास ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में चल रहे विरोध-प्रदर्शन, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने और सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना लोकतंत्र में नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि दिल्ली में प्रदर्शन करने से रोका गया तो देश के दूसरे हिस्सों में आंदोलन जारी रहेगा।
कासिम रसूल इलियास ने कहा कि लोकतंत्र में जब लोगों की बात नहीं सुनी जाती तो उनके पास विरोध-प्रदर्शन करने का रास्ता बचता है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वालों को रोकना गलत है। उन्होंने सवाल किया कि यदि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाती और प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में लिया जाता है, तो आम जनता अपनी बात कहां रखेगी। संसद के करीब धरना देने के लिए कोई दूसरा उपयुक्त स्थान नहीं बचा है।
इलियास ने कहा कि यदि लोगों ने पहले से मार्च का ऐलान किया था तो उन्हें शांतिपूर्ण मार्च करने देना चाहिए था। शांतिपूर्ण मार्च से परेशानी क्यों होनी चाहिए। उन्होंने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के फैसले की भी आलोचना की।
भारत में हो रहे प्रदर्शनों को विदेशों में चल रहे आंदोलनों से जोड़ने के मुद्दे पर इलियास ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों में लोग अत्याचार, सुविधाएं वापस लिए जाने और जनसमस्याओं के खिलाफ विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस सहित अन्य देशों में प्रदर्शन होने से भारत में हो रहे आंदोलनों की मांगों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। एसआईआर के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को आशंका है कि उनके वोट गलत तरीके से काटे जा रहे हैं। उन्होंने मतदान के अधिकार को संवैधानिक अधिकार बताते हुए कहा कि जब लोगों को लगता है कि उनके अधिकार प्रभावित हो रहे हैं तो विरोध करना उनके लिए अपनी बात रखने का रास्ता बन जाता है।
इलियास ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर रद्द करने और एसआईआर के आधार पर हुए चुनाव दोबारा कराने की मांग को जायज बताया। उन्होंने कहा कि ये मांगें केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ी हैं।
प्रदर्शन के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश किए जाने के आरोप पर इलियास ने कहा कि सत्ता परिवर्तन को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारें चुनाव के जरिए बदलती हैं और भारत में भी सत्ता परिवर्तन का रास्ता मतदान ही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बात सरकार से इस्तीफे की मांग और उसके बाद चुनाव कराने से संबंधित है। उन्होंने कहा कि देश में कोई सैन्य तख्तापलट या सेना की बगावत नहीं हो रही है। यदि सत्ता परिवर्तन होता है तो वह वोट के जरिए ही होना चाहिए।
कासिम रसूल इलियास ने कहा कि विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहेंगे। यदि दिल्ली में प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाती, तो देश के अन्य हिस्सों में आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हर सड़क को हम जंतर-मंतर बना देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, एसआईआर रद्द नहीं होता और संबंधित चुनाव दोबारा कराने की मांग पूरी नहीं होती।
--आईएएनएस
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