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विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार, मांग पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन: नसीम सिद्दीकी

मुंबई, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी एनसीपी-एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने भाजपा की सरकार पर विरोध प्रदर्शनों को कमजोर करने की साजिश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण, परिसीमन, महिला आरक्षण और सरकार बदलने को लेकर दिए जा रहे बयानों पर भी सवाल उठाए। सिद्दीकी ने कहा कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार हैं और आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं।
 

मुंबई, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी एनसीपी-एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने भाजपा की सरकार पर विरोध प्रदर्शनों को कमजोर करने की साजिश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण, परिसीमन, महिला आरक्षण और सरकार बदलने को लेकर दिए जा रहे बयानों पर भी सवाल उठाए। सिद्दीकी ने कहा कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार हैं और आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और एसएसआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नसीम सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम काटकर उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। पहले 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए और बाद में तीन करोड़ नए नाम शामिल किए जाने को उपलब्धि के रूप में पेश किया जा रहा है।

उन्होंने इस प्रक्रिया की तुलना कीमत बढ़ाने के बाद छूट देने से करते हुए कहा कि सरकार पहले लोगों को नुकसान पहुंचाती है और फिर कुछ राहत देकर उसे उपलब्धि बताती है। दुनिया में नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए अभियान चलाए जाते हैं, जबकि भारत में मतदाताओं के नाम काटने की मुहिम चलने का आरोप सामने आ रहा है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

प्रदर्शनों के कारण व्यापारियों को हो रहे नुकसान के सवाल पर सिद्दीकी ने कहा कि यह आंदोलन को कमजोर करने के लिए बनाया गया बहाना है। उन्होंने अन्ना हजारे के आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी दिल्ली में प्रदर्शन हुए थे, लेकिन व्यापारियों के नुकसान को इस तरह मुद्दा नहीं बनाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यापारी वर्ग का बड़ा हिस्सा भाजपा का समर्थक है और सरकार इस मुद्दे के जरिए आंदोलन को विफल करने की कोशिश कर रही है। देश की तरक्की के लिए साहू, फुले और अंबेडकर के विचारों पर चर्चा होनी चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान लोगों की गिरफ्तारी को लेकर सिद्दीकी ने कहा कि सरकार गिरफ्तारियां करती रहेगी, लोग जेल से बाहर आते रहेंगे और आंदोलन चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रखने का उनका रुख कायम रहेगा। सिद्दीकी ने दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए निकले कई लोगों को रास्तों, ट्रेनों और बसों में रोक दिया गया। इसके बावजूद लोगों ने अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आंदोलन को सफल बताते हुए कहा कि किसी एक प्रदर्शन में लोगों की संख्या के आधार पर पूरे आंदोलन की सफलता या असफलता तय नहीं की जा सकती।

मुंबई के आजाद मैदान में अनुमति लेकर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई ऐतिहासिक आंदोलनों का शहर है। उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि एक प्रदर्शन से किसी संघर्ष का भविष्य तय नहीं होता।

एकनाथ शिंदे और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से अराजकता तथा सरकार बदलने की कोशिशों को लेकर दिए गए बयानों पर सिद्दीकी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा से जुड़े लोग लगातार विरोध प्रदर्शनों को अराजकता बता रहे हैं। सिद्दीकी ने शिंदे के बयान पर निराशा जताते हुए कहा कि उनसे ऐसी टिप्पणी की उम्मीद नहीं थी। वहीं, राजनाथ सिंह के बयान पर उन्होंने कहा कि भारत में तख्तापलट नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन होता है और यह जनता के वोटों से तय होता है। संविधान में विश्वास रखने वाले लोगों के विरोध को अराजकता कहना संविधान और देश के नागरिकों का अपमान है।

परिसीमन के मुद्दे पर सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि भाजपा दक्षिण भारत में अपनी कमजोर राजनीतिक स्थिति के कारण वहां के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम करना चाहती है। दक्षिण भारत की सीटें घटाकर उत्तर भारत में सीटें बढ़ाने की आशंका के चलते विरोध हो रहा है।

महिला आरक्षण पर उन्होंने कहा कि इसे लागू किया जाना चाहिए और भाजपा को इसका पूरा श्रेय लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया गया था। उन्होंने मांग की कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और मुस्लिम महिलाओं के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। सिद्दीकी ने दावा किया कि 2029 में इंडिया गठबंधन को झटका नहीं लगेगा, बल्कि भाजपा को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों और जनता की नाराजगी का असर आने वाले समय में सामने आएगा।

--आईएएनएस

पीएसके