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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले विपक्षी नेता, यह जेन-जी की जीत है

नई दिल्ली, 26 जुलाई (आईएएनएस)। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे जेन-जी की जीत बताया है। सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। विपक्षी दलों ने उम्मीद जताई है कि वे छात्रों के हित में काम करेंगे।
 

नई दिल्ली, 26 जुलाई (आईएएनएस)। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे जेन-जी की जीत बताया है। सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। विपक्षी दलों ने उम्मीद जताई है कि वे छात्रों के हित में काम करेंगे।

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नैतिक आधार पर नहीं, बल्कि दबाव के कारण दिया गया। देश के युवा अपने भविष्य, अधिकारों और हक के लिए जंतर-मंतर पर सरकार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। यह युवाओं की जीत है। छात्रों पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया जाना गलत था। इस कार्रवाई की जितनी निंदा की जाए, कम है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस लड़ाई के लिए युवाओं और छात्रों का धन्यवाद किया है।

दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि खुशी है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर हो गया। यह लंबी लड़ाई का पहला पड़ाव पूरा होने जैसा है। अब छात्रों की जरूरतों पर ध्यान दिया जाए, पेपर लीक रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और छात्रों पर दर्ज केस वापस लिए जाएं। पेपर लीक से दुख होकर कई छात्रों ने अपनी जान गंवाई, दिल्ली में उन पर लाठीचार्ज किया गया। प्रधानमंत्री मोदी को माफी मांगनी चाहिए। वहीं, प्रह्लाद जोशी को छात्र हित में कार्य करना चाहिए।

बीजेडी सांसद सुलता देव ने कहा कि यह जेन-जी की जीत है, छात्रों की जीत है और लोकतंत्र की जीत है। जेन-जी ने सरकार को मजबूर कर दिया, इसलिए धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

उन्होंने वंदे मातरम् विधेयक पर भी बात करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर बैठे छात्र क्रांतिकारी आंदोलन चला रहे थे। वहां ‘वंदे मातरम्’ के नारे लग रहे थे, लेकिन सरकार को उनकी आवाज सुनाई नहीं दी। यह ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ जैसी भावना थी, फिर भी ध्यान नहीं दिया गया। किताबों में हजारों गलतियां हैं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया जाता।

सुलता देव ने कहा कि इस सरकार के 12 साल के शासन में 124 पेपर लीक हो चुके हैं। आज तक कोई चार्जशीट फ्रेम नहीं हुई, किसी की जिम्मेदारी तय कर जेल नहीं भेजा गया। कई बच्चों ने आत्महत्या कर ली। क्या उनके माता-पिता को बच्चे वापस लौटा सकते हैं? शपथ लेते समय समानता की शपथ ली जाती है, लेकिन व्यवहार में इसका पालन नहीं होता।

--आईएएनएस

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