विपक्ष के पास मुद्दे नहीं, इसलिए चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार पर लगा रहे आरोप: मनीषा कायंदे
मुंबई, 28 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और एसआईआर के मुद्दे पर कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक की पार्टियों के विरोध को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले वोटिंग मशीन को लेकर सवाल उठाता रहा और अब चुनाव आयोग पर आरोप लगा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने मुंबई कांग्रेस के प्रस्तावित प्रदर्शन, शिवाजी पार्क में सीजेपी के आंदोलन को अनुमति नहीं मिलने, उज्जैन में प्रार्थना स्थल के ढांचे और जनगणना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर अपनी राय रखी।
सीईसी और एसआईआर के मुद्दे पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से बैठक की तैयारी पर मनीषा कायंदे ने कहा कि कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक की पार्टियां पहले भी अलग-अलग आरोप लगा चुकी हैं। पहले विपक्ष ने वोटिंग मशीन पर सवाल उठाते हुए उसे खराब और वोटों में हेरफेर किए जाने का आरोप लगाया था। जब चुनाव आयोग की ओर से मशीन को हैक करके दिखाने की बात कही गई तो कोई सामने नहीं आया। अब कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट की पार्टी को पसंद नहीं करने वाले मतदाताओं के कारण पैदा हुई राजनीतिक स्थिति का जिम्मेदार चुनाव आयोग को बताया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी कमियों पर विचार करने के बजाय अपनी विफलता का आरोप दूसरों पर लगाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अब चुनाव आयोग और सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर भी इसी तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।
मुंबई कांग्रेस के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन पर मनीषा कायंदे ने कहा कि जब विपक्ष से सबूत मांगे जाते हैं तो उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं होता। विपक्ष के पास ठोस मुद्दे नहीं हैं और अब 2029 तक अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने के लिए कोई न कोई मुद्दा उठाना जरूरी है। कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के लिए लगातार विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। विपक्ष के पास वास्तविक मुद्दों की कमी है।
शिवाजी पार्क में सीजेपी को आंदोलन की अनुमति नहीं मिलने और उसके बाद जेल भरो आंदोलन की बात किए जाने पर कायंदे ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि आंदोलन की आड़ में युवाओं को भड़काने या गाली-गलौज जैसी स्थिति पैदा होने पर जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने कहा कि आज का युवा काम करना चाहता है। कई युवा रिसर्च, नौकरी और अपने करियर के साथ परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। युवाओं को एक जगह खड़े होकर प्रधानमंत्री या देश को गाली देने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
कायंदे ने कहा कि आंदोलनों में असामाजिक तत्वों के शामिल होने की आशंका भी रहती है। ऐसे में कानून-व्यवस्था को देखते हुए प्रदर्शन की अनुमति देना है या नहीं, यह पुलिस का विषय है। अगर कानून-व्यवस्था बिगड़ती है तो बाद में सरकार को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है, इसलिए पुलिस को अपनी जिम्मेदारी के तहत निर्णय लेना चाहिए।
शिवाजी पार्क में पहले हुई रैलियों का हवाला देते हुए कायंदे ने कहा कि जब जंतर-मंतर और देश के अलग-अलग हिस्सों में आंदोलन हुए और शिवाजी पार्क में भी बड़ी संख्या में लोग जुटे, तब अनुमति और व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जाने चाहिए। उन्होंने वहां हुई गंदगी का भी जिक्र किया और पूछा कि ऐसी स्थिति के लिए जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की गई थी या नहीं।
उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के दौरान रोड चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण के बीच एक प्रार्थना स्थल के ढांचे को हटाने की चर्चा पर मनीषा कायंदे ने कहा कि किसी भी ढांचे को हटाने से पहले यह देखना चाहिए कि वह कानूनी है या अवैध। अगर किसी सरकारी परियोजना के लिए किसी ढांचे को हटाने की जरूरत है तो सरकार को उस पर निर्णय लेने का अधिकार है। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा परियोजना के लिए अपने घर तक देने का उदाहरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने इसके जरिए एक उदाहरण पेश किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' में जनगणना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील पर कायंदे ने कहा कि जनगणना में भाग लेना महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसे देश के नागरिकों की नैतिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान नागरिकों से जाति, आर्थिक स्थिति और सामाजिक स्थिति समेत कई पहलुओं से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। इससे देश के नागरिकों की स्थिति का व्यापक आकलन तैयार होता है और इसी आधार पर सरकारें नीतियां तथा नई योजनाएं तैयार करती हैं।
कायंदे ने आगे कहा कि यदि देश के लिए नीतियां बनानी हैं तो सही तरीके से जनगणना होना जरूरी है और हर नागरिक को इसमें हिस्सा लेना चाहिए। देश में रहने वाले नागरिकों का यह नैतिक दायित्व है कि वे जनगणना में भाग लेकर देश के हित में योगदान दें।
--आईएएनएस
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