'सरकार भ्रम फैला रही, 10 दिन से जवाब मांग रहे थे, अब सत्र के अंतिम समय में बयान की बात कर रहे', विपक्ष का आरोप
नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को सदन में हंगामे और चर्चा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। जहां सरकार ने एफसीआरए बिल को संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी के पास भेजकर सर्वसम्मति बनाने की बात कही, वहीं विपक्ष ने इसे देरी से उठाया गया कदम और जनता के समय की बर्बादी करार दिया।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने पूरे सत्र के नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "देखिए, पूरा सत्र बीत चुका है। देश का इतना कीमती समय और पैसा बर्बाद हुआ, हंगामा हुआ, वॉकआउट होते रहे, और सदन बार-बार स्थगित होता रहा। अब सदन का लगभग आखिरी समय चल रहा हो, तब इस बात को उठाया जा रहा है। हमें समझ नहीं आ रहा कि इसमें इतनी देर क्यों हुई?"
कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने भी इसी मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा, "उन्हें 2 बजे आने दीजिए, क्योंकि सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। अगर केंद्रीय गृह मंत्री दोपहर 2 बजे सदन में आते हैं, तो शायद हमारी पार्टी कोई स्टैंड लेगी क्योंकि अब तक तो वे यही कह रहे थे कि वे नहीं आ रहे हैं। मुझे नहीं पता कि क्या वजह है। वे संसद में आ रहे हैं, लेकिन लोकसभा या राज्यसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं हो रहे हैं। उन्हें क्या दिक्कत है? अगर उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है, तो किस बात ने उन्हें इतने दिनों तक छिपने और हमें हर दिन मकर द्वार पर धरना-प्रदर्शन के लिए मजबूर किया?"
रेड्डी ने आगे सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "इसके बजाय, वे पिछले सप्ताह ही ऐसा कर सकते थे। कम से कम सदन का कामकाज तो चलता रहता। अब, आखिरी दिन है और हम सत्र के समापन के बहुत करीब हैं। मुझे नहीं पता कि वे देश के लोगों को भ्रमित करने और यह दिखाने के लिए बयान क्यों देना चाहते हैं कि गलती हमारी है। हमने कुछ भी गलत नहीं किया है। हम पिछले 10 दिनों से उनसे जवाब मांग रहे हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया है। आज 12 तारीख है और गुरुवार को सत्र का आखिरी दिन है, और वे कह रहे हैं, 'मैं 3 बजे आऊंगा।' 2 बजे क्यों नहीं? यह सिर्फ देश के लोगों को भ्रमित करने और यह संदेश देने के लिए है कि विपक्षी पार्टियां ही सदन को चलने से रोक रही हैं।"
--आईएएनएस
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