'विकसित महाराष्ट्र 2047' के लिए एनबीएफसी बनाने की दिशा में बड़ा कदम, सरकार ने बनाई टेंडर समिति
मुंबई, 7 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने अपने दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को गति देने के लिए सोमवार को एक विशेष टेंडर समिति का गठन किया है। यह समिति राज्य के लिए एक समर्पित वित्तीय संस्था के गठन और उसके संचालन की प्रक्रिया की निगरानी करेगी।
यह संस्था भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में पंजीकृत होगी। इसका उद्देश्य 'विकसित महाराष्ट्र 2047' योजना के तहत अगले दस वर्षों में राज्य की अनुमानित 25 से 35 लाख करोड़ रुपए की बुनियादी ढांचा ऋण आवश्यकता को पूरा करना है।
वित्त विभाग द्वारा जारी सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के अनुसार, नई बहु-विषयक समिति एक विशेषज्ञ सलाहकार एजेंसी के चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।
सलाहकार एजेंसी का चयन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) के माध्यम से इच्छुक संस्थाओं की शॉर्टलिस्टिंग होगी, जबकि दूसरे चरण में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) के जरिए अंतिम चयन किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य अगले 10 वर्षों में राज्य की 25 से 35 लाख करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना है।
महाराष्ट्र सरकार का लक्ष्य राज्य की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2029-30 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और वर्ष 2047 तक 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। बाजार की अस्थिर परिस्थितियों को देखते हुए, 'विकसित महाराष्ट्र 2047' के लिए आवश्यक 25 से 30 लाख करोड़ रुपए की वित्तीय जरूरत को एनबीएफसी के माध्यम से जुटाने की योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार के अनुसार, कुल ऋण आवश्यकता में से 10 से 12 लाख करोड़ रुपए मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे और नागपुर में मेट्रो विस्तार, कोस्टल रोड विस्तार, शक्तिपीठ एवं रिंग एक्सप्रेसवे तथा वधावन पोर्ट कनेक्टिविटी जैसी परियोजनाओं पर खर्च किए जाएंगे। 3.5 से 4.5 लाख करोड़ रुपए सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन, पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं, ग्रिड आधुनिकीकरण और 24 घंटे ग्रामीण जलापूर्ति नेटवर्क पर लगाए जाएंगे।
3 से 4 लाख करोड़ रुपए एआई इनोवेशन सिटी, सेमीकंडक्टर क्लस्टर, ऑटो और ईवी विनिर्माण क्षेत्र तथा लॉजिस्टिक्स पार्कों के विकास पर खर्च होंगे। 1 लाख करोड़ रुपए द्वीप पर्यटन, तटीय क्रूज, किलों के संरक्षण और लग्जरी रिसॉर्ट हब के लिए निर्धारित किए गए हैं। 1.5 लाख करोड़ रुपए स्मार्ट गांवों के उन्नयन, सूक्ष्म सिंचाई नेटवर्क और ग्रामीण कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स के विकास पर खर्च किए जाएंगे।
पहले चरण में ईओआई के जरिए पात्रता जांच की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में तकनीकी प्रस्तुति और वित्तीय बोली की प्रक्रिया होगी। पारदर्शिता, निष्पक्षता और कंपनी अधिनियम 2013 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के लिए चार सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है।
समिति में प्रशासनिक, कानूनी और वित्तीय क्षेत्रों के प्रमुख अधिकारी शामिल किए गए हैं। समिति की अध्यक्षता वित्त विभाग के सचिव (वित्तीय सुधार) करेंगे। इसके अलावा कानून एवं न्याय विभाग का एक प्रतिनिधि, आरबीआई या किसी प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक द्वारा नामित विशेषज्ञ तथा वित्त विभाग के उप सचिव सदस्य सचिव के रूप में शामिल होंगे।
समिति को पूरी निविदा प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें ईओआई के लिए पात्रता मानदंड तय करना, प्राप्त आवेदनों की जांच, तकनीकी प्रस्तुतियों का मूल्यांकन, 70 या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाली सलाहकार एजेंसियों को आरएफपी चरण के लिए चयनित करना और अंततः वित्तीय व तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर राज्य सरकार को अंतिम सिफारिश देना शामिल है।
सरकार का मानना है कि यह पहल महाराष्ट्र के दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा विकास और आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
--आईएएनएस
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