एसआरएमआईएसटी के 22वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति बोले-'विकसित भारत में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका'
चेन्नई, 16 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रविवार को चेन्नई के पास चेंगलपट्टू के कट्टनकुलथुर में स्थित एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एसआरएमआईएसटी) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने स्नातक छात्रों से 'राष्ट्र प्रथम' के सिद्धांत से प्रेरित होकर राष्ट्र निर्माण के लिए अपने ज्ञान, कौशल और नवाचार का उपयोग करने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह मात्र उपाधि प्रदान करने से कहीं अधिक है। यह वर्षों की लगन, अनुशासन और ज्ञान का उत्सव है, साथ ही यह जीवन भर की जिम्मेदारी और सेवा की यात्रा की शुरुआत का प्रतीक भी है।
सीपी राधाकृष्णन ने अंतरविषयक शिक्षा, रचनात्मकता, उद्यमिता और आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देने वाले शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के लिए एसआरएमआईएसटी की सराहना की। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर अनुसंधान, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और सतत विकास पर संस्थान के बढ़ते ध्यान का उल्लेख करते हुए कहा कि ये क्षेत्र भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को रूप देंगे।
उपराष्ट्रपति ने जीवन में सुधार लाने वाले, उद्योग मजबूत करने वाले और सतत विकास में योगदान देने वाले अनुसंधान को व्यावहारिक समाधानों में बदलने पर एसआरएमआईएसटी की सराहना की। उन्होंने कहा कि अनुसंधान तभी अपने सर्वोच्च उद्देश्य को प्राप्त करता है जब वह समाज की सेवा करता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि अनुसंधान तभी सही मायने में सराहनीय होता है जब वह सही परिणाम देता है, समाज पर सार्थक प्रभाव डालता है और उससे लोगों को व्यावहारिक लाभ होता है।
उपराष्ट्रपति ने कोविड-19 महामारी के प्रति भारत की प्रतिक्रिया को याद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 100 से अधिक देशों को कोविड-19 टीके उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि भारत ने मानवीय सहायता का व्यवसायीकरण करने का प्रयास नहीं किया।
उन्होंने हाल ही में केन्या के स्पीकर जिन्होंने भारत की वैक्सीन सहायता के लिए आभार व्यक्त किया था, उनके साथ हुई बातचीत को याद करते हुए कहा कि कई पश्चिमी देशों ने गरीब देशों को इस तरह की सहायता प्रदान नहीं की। उन्होंने आगे कहा कि भारत के प्रयासों ने मानवता की रक्षा में मदद की और दोहराया कि भारत शांति, विकास और मानवता के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि एम्स पूरे देश में होने चाहिए ताकि चिकित्सा सुविधाएं और चिकित्सा शिक्षा पूरे भारत के लोगों तक पहुंच सके।
उपराष्ट्रपति ने 2014 से देश में उच्च शिक्षा के विस्तार के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान 16 आईआईआईटी, 8 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 8 आईआईएम, 7 आईआईटी, 2 आईआईएसईआर, 1 एनआईटी और 12 एम्स स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत में 1,425 से अधिक विश्वविद्यालय, 54,000 कॉलेज और 16,850 स्वतंत्र संस्थान हैं।
सी. पी. राधाकृष्णन ने उच्च शिक्षा में महिलाओं के नामांकन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि के बारे में भी बताया। यह 2014-15 में 1.57 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 2.24 करोड़ हो गई, यानी इसमें 42.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोहों में डिग्री और पदक प्राप्त करने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या एक स्वागत योग्य कदम है।
सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि स्नातक भारत के विकसित भारत 2047 की यात्रा में एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक विकसित, नवोन्मेषी, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना प्रत्येक युवा भारतीय से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान करती है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति इसके लोग हैं, विशेषकर इसके युवा। उन्होंने स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, "केवल भविष्य के लिए तैयारी न करें; भविष्य को आकार देने की तैयारी करें।" उन्होंने छात्रों से मादक पदार्थों और सभी प्रकार के नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने का आग्रह किया और उनसे 'ध्यान भटकाने वाली चीजों के बजाय अनुशासन, प्रलोभन के बजाय उद्देश्य और आसान रास्तों के बजाय उत्कृष्टता' को चुनने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि तमिलनाडु में हाल ही में हुई घटना, जिसमें एक छात्र की मादक पदार्थों के व्यापार के बारे में जानकारी साझा करने पर हत्या कर दी गई, अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उन्होंने अपने परिवार के किसी सदस्य को खो दिया हो।
उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से 'राष्ट्र प्रथम' को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि उनका ज्ञान, नवाचार और परिश्रम भारत की प्रगति, सुरक्षा और समृद्धि में योगदान देना चाहिए। उन्होंने उनसे संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने, विविधता का सम्मान करने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर व्यापक राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने अपने समापन भाषण में स्नातकों से आग्रह किया कि वे ज्ञान, कर्तव्य, करुणा और सेवा के शाश्वत भारतीय मूल्यों को अपने साथ लेकर चलें। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के ऑटोमोटिव बिजनेस अध्यक्ष आर. वेलुसामी को मानद उपाधि प्रमाण पत्र प्रदान किया और स्नातकों को पदक, रैंक और उपाधियां प्रदान की। उन्होंने स्नातकों और छात्रों को ‘नशीली दवाओं को ना कहें’ की शपथ भी दिलाई।
इस अवसर पर तमिलनाडु और केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, एसआरएमआईएसटी के कुलाधिपति डॉ. टी. आर. पारिवेंधर, प्रो-चांसलर (प्रशासन) डॉ. रवि पचामुथु, प्रो-चांसलर (अकादमिक) डॉ. पी. सत्यनारायणन, कुलपति डॉ. सी. मुथमिज़्चेलवन और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
--आईएएनएस
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