विजेता निर्दलीय उम्मीदवारों का भाजपा में स्वागत, कांग्रेस की खुल चुकी कलईः राजेंद्र राठौड़
जयपुर, 18 सितंबर (आईएएनएस)। भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने मिर्जापुर गीत को लेकर लिखे उनके पत्र का संज्ञान लिया है। इसके साथ ही अशोक गहलोत के आरोपों का खंडन करते हुए उन्होंने नगर निगम चुनावों में भाजपा के दमदार प्रदर्शन का दावा किया।
'मिर्जापुर' फिल्म के एक गाने पर भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने आईएएनएस से कहा, "निश्चित रूप से, दिल्ली हाईकोर्ट ने बहुत अच्छा फैसला सुनाया है। मैंने सेंसर बोर्ड के चेयरमैन को पत्र लिखकर कहा था कि 'मिर्जापुर' में महाराणा प्रताप को समर्पित एक गाने को जिस तरह हिंसा के साथ दिखाया गया और एक गैंग से जोड़ा गया, उससे उन लोगों की भावनाएं आहत हुईं जो महाराणा प्रताप को जानते हैं और उनका सम्मान करते हैं।"
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान पर राठौड़ ने कहा, "हर जगह जीतने वाले पार्षदों की संख्या जनता के सामने है। अगर जीतने वाले निर्दलीय उम्मीदवार भजन लाल शर्मा की नीतियों और शहरी विकास के लिए उनके द्वारा पेश किए गए घोषणापत्र से प्रभावित होकर भाजपा में शामिल होते हैं और भाजपा का समर्थन करते हैं, तो हम उनका समर्थन क्यों न स्वीकार करें। जब हार सामने दिखती है तो कांग्रेस के नेता ईवीएम समेत अन्य चीजों को दोष देने लगते हैं।"
भाजपा नेता ने कहा, "निर्दलीय उम्मीदवार अगर स्वतः भाजपा का समर्थन करते हैं तो उनका समर्थन लेंगे। समर्थन लेने से पहले भाजपा ज्वाइन भी करा रहे हैं। इस बात से किसी को तकलीफ हो रही है तो होती रहे। कांग्रेस की कलई पूरे देश में खुल चुकी है। कांग्रेस टुकड़ों में बटी है। नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस के बड़े नेता प्रचार करने जनता के बीच नहीं गए। अशोक गहलोत और सचिन पायलट भी अपने गृह क्षेत्रों तक सीमित रहे।"
राजेंद्र राठौड़ ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना जन्मदिन नहीं मना रहे हैं, बल्कि भारत के लोग सेवा संकल्प के रूप में जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर जब कोई जनसरोकार से जुड़ा काम किया जा रहा है तो कांग्रेस और अशोक गहलोत को क्यों तकलीफ हो रही है।
वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने स्वरा भास्कर के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि जो लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अभाव की शिकायत करते हैं, उन्हें अयोध्या के राम मंदिर के संबंध में इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर शर्म आनी चाहिए। ऐसे लोग सिर्फ हिंदू धर्म और मंदिर के बारे में ही टिप्पणी करते हैं, अन्य धर्मों के बारे में बोलकर दिखाएं, तब पता चलेगा। हमारी सहनशीलता के कारण ऐसे लोगों की हिम्मत बढ़ रही है।
--आईएएनएस
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