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विजय भारद्वाज: टीम इंडिया के लिए रहे 'वन सीरीज वंडर', कर्नाटक को तीन बार बनाया रणजी चैंपियन

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। किसी भी कहानी का आगाज अगर बेहतरीन रहा हो, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसका अंजाम भी ठीक वैसा ही हो। भारतीय क्रिकेटर विजय भारद्वाज की कहानी ऐसी ही है। विजय भारद्वाज के भारतीय टीम के साथ सफर का आगाज धमाकेदार अंदाज में हुआ था, और उन्हें भविष्य का एक बड़ा सितारा माना गया, लेकिन कुछ ही मैचों में उनका करिश्मा समाप्त हो गया और वह टीम से बाहर हो गए। फिलहाल, वह क्रिकेट कोच और कमेंटेटर के तौर पर सक्रिय हैं।
 

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। किसी भी कहानी का आगाज अगर बेहतरीन रहा हो, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसका अंजाम भी ठीक वैसा ही हो। भारतीय क्रिकेटर विजय भारद्वाज की कहानी ऐसी ही है। विजय भारद्वाज के भारतीय टीम के साथ सफर का आगाज धमाकेदार अंदाज में हुआ था, और उन्हें भविष्य का एक बड़ा सितारा माना गया, लेकिन कुछ ही मैचों में उनका करिश्मा समाप्त हो गया और वह टीम से बाहर हो गए। फिलहाल, वह क्रिकेट कोच और कमेंटेटर के तौर पर सक्रिय हैं।

विजय भारद्वाज का जन्म 15 अगस्त 1975 को बेंगलुरु, कर्नाटक में हुआ था। 1994-95 में राज्य की टीम के लिए डेब्यू करने वाले विजय ने घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन के दम पर 1999 में भारतीय टीम में जगह बनाई। उनकी पहली सीरीज बेहद यादगार रही। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एलजी कप (1999-2000) में अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी के दम पर भारद्वाज को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। सीरीज में 10 विकेट लेने के अलावा निचले क्रम में उन्होंने 89 रन भी बनाए थे। उस सीरीज के बाद उन्हें भारतीय टीम के लिए बेहद अहम सदस्य के तौर पर देखा जाने लगा, लेकिन पहले टेस्ट और फिर वनडे में प्रदर्शन में आई गिरावट की वजह से वह टीम से बाहर हो गए और फिर कभी वापसी नहीं कर सके।

विजय भारद्वाज ने सितंबर 1999 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारतीय टीम के लिए डेब्यू किया था। वहीं, नीली जर्सी में उन्होंने अपना आखिरी मुकाबला 2002 में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेला था। इस ऑलराउंडर ने 3 टेस्ट मैचों की 3 पारियों में 28 रन बनाए और 1 विकेट लिया। वहीं, 10 वनडे मैचों की 9 पारियों में 136 रन बनाने के अलावा 16 विकेट लिए।

हालांकि, कर्नाटक के लिए घरेलू क्रिकेट में विजय भारद्वाज का लंबा और शानदार करियर रहा है। उन्हें बड़ी सफलता भी मिली है। उन्होंने इस टीम के लिए 1994-95 से 2004 के बीच 96 प्रथम श्रेणी और 72 लिस्ट ए मैच खेले। प्रथम श्रेणी मैचों की 149 पारियों में 14 शतक और 26 अर्धशतक लगाते हुए उन्होंने 5,553 रन बनाए और 59 विकेट लिए। वहीं, 66 लिस्ट ए पारियों में 1 शतक और 5 अर्धशतक लगाते हुए 1707 रन बनाने के अलावा 46 विकेट लिए। वह 90 के दशक में कर्नाटक की तीन रणजी ट्रॉफी जीत का हिस्सा थे। 2000 से 2002 तक कर्नाटक टीम के कप्तान रहे।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर विजय भारद्वाज ने 4 नवंबर 2006 को क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास ले लिया।

संन्यास के बाद, विजय भारद्वाज कोचिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह नेशनल क्रिकेट एकेडमी (एनसीए), बेंगलुरु से सर्टिफाइड लेवल थ्री कोच हैं। वह इंडियन प्रीमियर लीग के पहले तीन सीजन में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के सहायक कोच थे। विजय ओमान क्रिकेट टीम के फील्डिंग कोच भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह कन्नड़ भाषा के अग्रणी क्रिकेट कमेंटेटर हैं। वह आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स से भी जुड़े रहे हैं।

--आईएएनएस

पीएके