विदेशी फंडिंग मामले में सीबीआई का बड़ा एक्शन, टीटीआई समेत 7 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। विदेशी फंडिंग से जुड़े एक कथित मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका स्थित संस्था द टिमोथी इनिशिएटिव (टीटीआई) और उससे जुड़े सात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
मामला विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के कथित उल्लंघन, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नष्ट करने जैसे आरोपों से जुड़ा है।
सीबीआई की दिल्ली स्थित आर्थिक अपराध शाखा (ईओ-II) ने 27 अगस्त 2026 को यह मामला दर्ज किया। एफआईआर में जोनाथन एस राजन, मिकाह मार्क, अजीत वर्गीज मथाई, वर्गीज चाको, बाबलू कुर्मी, सुप्रीम जॉय और द टिमोथी इनिशिएटिव (टीटीआई), यूएसए को आरोपी बनाया गया है। मामले की जांच इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार गुप्त को सौंपी गई है।
एफआईआर के अनुसार, आरोप है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत अमेरिका के ट्रुइस्ट बैंक द्वारा जारी विदेशी डेबिट कार्डों का उपयोग कर भारत के विभिन्न एटीएम से बड़ी मात्रा में विदेशी धनराशि निकाली। जांच एजेंसियों का दावा है कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 92.55 करोड़ रुपए (लगभग 99.95 लाख अमेरिकी डॉलर) की राशि एफसीआरए प्रावधानों के कथित उल्लंघन में इस्तेमाल की गई।
इसके अलावा, जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच करीब 44 करोड़ रुपए विदेशी डेबिट कार्डों के माध्यम से कर्नाटक, छत्तीसगढ़, असम और अन्य राज्यों में निकाले जाने का भी आरोप है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच रिपोर्ट, जिसके आधार पर गृह मंत्रालय ने सीबीआई जांच की सिफारिश की, में कहा गया है कि 18 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु हवाई अड्डे पर मिकाह मार्क के पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद किए गए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन कार्डों पर 'संतोष कुमार' नाम दर्ज था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वास्तविक पहचान छिपाने और केवाईसी नियमों से बचने के लिए इन कार्डों को इस नाम से जारी कराया गया था। जांच में भारत में 1,000 से अधिक ऐसे डेबिट कार्ड वितरित किए जाने का दावा भी किया गया है।
ईडी की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि जोनाथन राजन भारत में टीटीआई की गतिविधियों के प्रभारी थे, जबकि अजीत वर्गीज मथाई वित्तीय संचालन से जुड़े प्रमुख व्यक्ति थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, विदेशी डेबिट कार्डों के जरिए एटीएम से निकाली गई राशि का उपयोग भारत में टीटीआई की विभिन्न गतिविधियों के लिए किया जाता था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन गतिविधियों में प्रशिक्षण कार्यक्रम, धार्मिक प्रचार और अन्य आयोजन शामिल थे। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि टीटीआई ने भारत में 95 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च की।
जांच एजेंसियों के अनुसार, 18 अप्रैल 2026 को मिकाह मार्क के ठिकाने पर तलाशी के दौरान कई जगहों समेत एक एचपी लैपटॉप में वित्तीय और लेखा संबंधी डेटा मिला था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 18 अप्रैल को बिल डॉट कॉम पर भारत से संबंधित जानकारी का एक्सेस प्रतिबंधित हो गया और उसी दिन लैपटॉप का पूरा डेटा मिटा दिया गया। अगले दिन क्विकबुक्स पर उपलब्ध भारत संबंधी डेटा का एक्सेस भी बंद कर दिया गया। ईडी ने इसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नष्ट करने या जांच एजेंसियों की पहुंच से दूर करने का प्रयास बताया है। इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं को भी मामले में शामिल किया गया है।
गृह मंत्रालय के एफसीआरए प्रभाग ने ईडी की जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की थी। मंत्रालय ने कहा कि एफसीआरए की धारा 43 और केंद्र सरकार की अधिसूचना के तहत मामले की आगे की जांच सीबीआई करेगी।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि जांच के दौरान आयकर अधिनियम, धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) या अन्य कानूनों के उल्लंघन के सबूत सामने आते हैं, तो संबंधित एजेंसियों को आगे की कार्रवाई के लिए मामला भेजा जा सकता है।
--आईएएनएस
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