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वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट: मध्य गुजरात बनेगा औद्योगिक और पर्यटन विकास का नया ग्लोबल हब

गांधीनगर, 22 मई (आईएएनएस)। वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट की ऐतिहासिक सफलता और विरासत को आगे बढ़ाते हुए, राज्य सरकार अब क्षेत्रीय विकास को नई रफ्तार देने की तैयारी में है।
 
वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट: मध्य गुजरात बनेगा औद्योगिक और पर्यटन विकास का नया ग्लोबल हब

गांधीनगर, 22 मई (आईएएनएस)। वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट की ऐतिहासिक सफलता और विरासत को आगे बढ़ाते हुए, राज्य सरकार अब क्षेत्रीय विकास को नई रफ्तार देने की तैयारी में है।

इसी विजन के तहत वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) का अगला भव्य आयोजन जून 2026 के अंतिम सप्ताह में वडोदरा में होने जा रहा है, जो मुख्य रूप से 'मध्य गुजरात' क्षेत्र पर केंद्रित होगा। अहमदाबाद, गांधीनगर, वडोदरा, आणंद, खेड़ा, पंचमहाल, दाहोद, छोटाउदेपुर, नर्मदा और महीसागर सहित 10 जिलों वाला यह क्षेत्र, राज्य के कुल विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) उत्पादन में 28 प्रतिशत की मजबूत हिस्सेदारी रखता है।

वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (2022-23) के आधिकारिक जिला-स्तरीय आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य के औद्योगिक परिदृश्य में इस क्षेत्र का असाधारण दबदबा नजर आता है। राज्य के कुल 'अन्य परिवहन उपकरण' (जिसमें रेलवे लोकोमोटिव, रोलिंग स्टॉक, विमान, अंतरिक्ष यान, दोपहिया और तिपहिया वाहन आदि शामिल हैं) के विनिर्माण उत्पादन में मध्य गुजरात का योगदान अकेले 93 प्रतिशत है। इसके अलावा, ऑटो और ऑटो कंपोनेंट्स में 92%, पेय पदार्थों में 70%, तथा फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रिकल उपकरणों प्रत्येक में 63% का भारी योगदान इसी क्षेत्र से आता है।

निवेशकों के लिए यह क्षेत्र इसलिए भी सबसे आदर्श गंतव्य है क्योंकि गुजरात का लगभग 62% कुल क्षेत्रफल दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) के प्रभाव क्षेत्र में आता है। इस कॉरिडोर की प्रगति को गति देने के लिए मध्य गुजरात में दो फ्लैगशिप प्रोजेक्ट्स विकास के विभिन्न चरणों में तेजी से आकार ले रहे हैं जिसमें 5,560 एकड़ में फैला धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेन्ट रीजन (डीएसआईआर) और 2,849 एकड़ का मांडल-बेचराजी स्पेशल इन्वेस्टमेन्ट रीजन (एमबीएसआईआर) शामिल हैं।

मध्य गुजरात की सबसे बड़ी ताकत इसकी जिलावार औद्योगिक विविधता और विशेषज्ञता है। वडोदरा का रसायन और पेट्रोकेमिकल्स क्षेत्र जिले के कुल विनिर्माण उत्पादन का 61% हिस्सा संभालता है। वहीं, अहमदाबाद ऑटो और ऑटो कंपोनेंट्स (18%), टेक्सटाइल (15%), बेसिक मेटल्स (13%) और फार्मास्यूटिकल्स (9%) में अग्रणी है। गांधीनगर का विनिर्माण उत्पादन मुख्य रूप से फूड प्रोसेसिंग (18%), बेसिक मेटल्स (17%) और रसायनों (14%) द्वारा संचालित है। इसके साथ ही राज्य की राजधानी अपने शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग और 'गिफ्ट सिटी' की उपस्थिति के माध्यम से क्षेत्र के इलेक्ट्रॉनिक्स और वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्रों का नेतृत्व करती है।

दूसरी ओर, आणंद का विनिर्माण आधार मुख्य रूप से एग्रो और डेयरी प्रोसेसिंग (50%) तथा रसायनों (12%) पर टिका है। पंचमहाल अपनी ताकत ऑटो और ऑटो कंपोनेंट्स (23%), रबर और प्लास्टिक (19%) तथा फार्मास्यूटिकल्स (15%) सेक्टर से प्राप्त करता है, जबकि खेड़ा रबर और प्लास्टिक उत्पादों (23%) तथा फूड प्रोसेसिंग (22%) द्वारा संचालित है। जनजातीय और ग्रामीण बेल्ट में, नर्मदा के उत्पादन में फूड प्रोसेसिंग (92%) का पूर्ण दबदबा है, जबकि छोटाउदेपुर एग्रो और फूड प्रोसेसिंग (56%) तथा दाहोद फूड प्रोसेसिंग (48%) के माध्यम से इस विकास यात्रा में अपनी ठोस भागीदारी दर्ज करा रहे हैं।

मध्य गुजरात की व्यावसायिक पहुंच अब दुनिया के नक्शे पर 219 से अधिक देशों तक फैल चुकी है। वित्त वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र का कुल निर्यात 20.54 बिलियन डॉलर के जादुई आंकड़े को छू गया। इस निर्यात बास्केट में 3.67 बिलियन डॉलर (17.8%) की हिस्सेदारी के साथ फार्मास्यूटिकल्स सबसे आगे रहा। इसके बाद परमाणु रिएक्टर, बॉयलर और मशीनरी का योगदान 2.79 बिलियन डॉलर (13.6%), इलेक्ट्रिकल मशीनरी और उपकरण 1.79 बिलियन डॉलर (8.7%), सड़क वाहन और पुर्जे 1.47 बिलियन डॉलर (7%), ऑर्गेनिक केमिकल्स 1.45 बिलियन डॉलर (7%), और रंगाई, टैनिंग व कलरिंग मैटर 1.03 बिलियन डॉलर (5%) का स्थान रहा। वैश्विक बाजारों में अमेरिका (यूएसए) मध्य गुजरात के उत्पादों का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है, जिसकी कुल निर्यात में 23.8% (4.88 बिलियन डॉलर) की हिस्सेदारी रही, जिसके बाद क्रमशः यूएई (7.3%), थाईलैंड (3%), यूके (2.8%), और सऊदी अरब (2.7%) का नंबर आता है।

आगामी वीजीआरसी (मध्य गुजरात) में न केवल पारंपरिक उद्योगों, बल्कि भविष्य के हाई-टेक सेक्टर्स पर विशेष जोर दिया जाएगा। इस सम्मेलन के फोकस क्षेत्रों में सेमीकंडक्टर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और आईटीईएस, बायोटेक, फार्मास्यूटिकल्स, एयरोस्पेस और रक्षा, फिनटेक, ऑटो और ऑटो कंपोनेंट्स, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग, शिक्षा, रसायन और पेट्रोकेमिकल्स, वस्त्र और परिधान, ग्रीन एनर्जी इकोसिस्टम, कौशल विकास, स्टार्टअप्स, एमएसएमई, तथा पर्यटन और संस्कृति शामिल हैं।

इस सम्मेलन की एक और बड़ी विशेषता क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति देने के लिए 'पर्यटन और संस्कृति' को एक बड़े उत्प्रेरक के रूप में पेश करना है। हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए अहमदाबाद के गांधी आश्रम, वडोदरा के ऐतिहासिक लक्ष्मी विलास पैलेस, गांधीनगर के स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर और पंचमहाल स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल 'चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्व पार्क' के जरिए अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने की बड़ी रणनीति है। विरासत से परे, यह क्षेत्र नर्मदा की विश्व प्रसिद्ध 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी', नलसरोवर पक्षी अभयारण्य और पावागढ़ हिल कॉरिडोर के माध्यम से इको-टूरिज्म और अनुभवात्मक यात्रा जैसी पहलों को भी बढ़ावा दे रहा है। साथ ही, गांधीनगर का महात्मा मंदिर जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं की बदौलत यह क्षेत्र आकर्षक एमआईसीई यानी मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेसिंग और एग्जीबिशन पर्यटन का एक प्रमुख ग्लोबल हब बन रहा है।

वीजीआरसी का यह क्षेत्रीय फॉर्मेट निवेश जुटाने और वैश्विक भागीदारी का एक प्रामाणिक और बेहद सफल फॉर्मूला बन चुका है। 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्यों के अनुरूप आयोजित हुए पिछले तीनों संस्करणों ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इस शृंखला की शुरुआत अक्टूबर 2025 में मेहसाणा में आयोजित उत्तर गुजरात के उद्घाटन संस्करण से हुई, जिसने 29,000 से अधिक पंजीकरणों और 80 से अधिक देशों के 440 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की ऐतिहासिक भागीदारी देखी, जिसके परिणामस्वरूप 3.25 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के साथ 1,264 एमओयू पर मुहर लगी।

इसके बाद, जनवरी 2026 में राजकोट में आयोजित कच्छ और सौराष्ट्र संस्करण ने लगभग 29,000 पंजीकरणों और 57 देशों के करीब 400 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को आकर्षित किया, जिसके तहत 5.78 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश प्रस्तावों वाले 5,492 एमओयू का एक नया रिकॉर्ड बना। इसी सफल कड़ी को आगे बढ़ाते हुए, हाल ही में मई 2026 में सूरत में संपन्न दक्षिण गुजरात संस्करण ने भी 20,000 से अधिक पंजीकरणों और 27 देशों के 150 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की सक्रिय हिस्सेदारी के साथ 3.53 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाले 2,792 एमओयू को सफलतापूर्वक धरातल पर उतारा।

इन लगातार ऐतिहासिक सफलताओं के बाद, अब देश-विदेश के निवेशकों की निगाहें वडोदरा में होने वाले इस आगामी महामंथन पर टिकी हैं, जो मध्य गुजरात को वैश्विक पटल पर विकास के एक नए रोल मॉडल के रूप में स्थापित करने जा रहा है।

--आईएएनएस

डीएससी