वाराणसी में विश्व संगोष्ठी के दूसरे दिन प्राचीन ज्ञान पर मंथन, एआई और ग्रीन एनर्जी पर भी हुई चर्चा
वाराणसी, 3 नवंबर (आईएएनएस)। विश्व संगोष्ठी 'प्राचीन ज्ञान से आधुनिक चुनौतियां' के दूसरे दिन दुनियाभर के विद्वानों ने प्राचीन दर्शन और आधुनिक समस्याओं के समाधान पर मंथन किया। हांगकांग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जस्टिन टिवाल्ड ने राजनीति, सामाजिक सद्भाव, एआई और ग्रीन एनर्जी पर चर्चा को अहम बताया, तो लंदन के एसओएएस विश्वविद्यालय की मंजीत रामगोत्रा ने कहा कि यह सम्मेलन पश्चिमी ज्ञान से आगे जाकर ज्ञान के अन्य स्रोतों को देखने के लिए प्रेरित करता है।
विश्व संगोष्ठी 'प्राचीन ज्ञान से आधुनिक चुनौतियां' के दूसरे दिन हांगकांग विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर जस्टिन टिवाल्ड ने कहा, "मैं यहां एक प्रस्तुतकर्ता और एक प्रतिभागी दोनों के रूप में इस अद्भुत सम्मेलन में शामिल हूं, जो प्राचीन ज्ञान और आधुनिक दुनिया में इसकी प्रासंगिकता पर केंद्रित है। चर्चाएं विशेष रूप से राजनीति और सामाजिक सद्भाव पर केंद्रित हैं। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्रीन एनर्जी जैसे समकालीन मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है।"
प्रोफेसर जस्टिन टिवाल्ड ने कहा कि यह मुद्दा शासन और जिसे हम अच्छे या बुरे शासन के लिए जिम्मेदार प्राथमिक कारक कह सकते हैं, उससे जुड़ा है। इस मुद्दे को समझने के लिए, खराब शासन के दौर में रहने की कल्पना कीजिए, जब सरकार की बुनियादी जिम्मेदारियां पूरी नहीं हो रही हों, चाहे वह स्वास्थ्य सेवा हो, संसाधनों का निष्पक्ष वितरण हो या अन्य आवश्यक क्षेत्र हों।
लंदन के एसओएएस यूनिवर्सिटी की सीनियर लेक्चरर मंजीत रामगोत्रा ने कहा कि यह सम्मेलन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दुनियाभर से प्राचीन दर्शन पर चर्चाओं को एक व्यापक मंच पर लाता है। यह पता लगाता है कि प्राचीन ज्ञान समकालीन चुनौतियों से निपटने में कैसे मदद कर सकता है। साथ ही, आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत, दर्शन, संस्थाओं और लोकतंत्र पर एक आलोचनात्मक दृष्टिकोण भी पेश करता है। यह हमें पश्चिमी ज्ञान और मूल्यों से परे देखने और समाज की हमारी समझ को आकार देने में मदद के लिए ज्ञान के अन्य स्रोतों का पता लगाने के लिए भी प्रोत्साहित करता है।
मंजीत रामगोत्रा ने कहा कि मैं यहां आकर वास्तव में बहुत खुश हूं। विश्वास कीजिए या नहीं, यह भारत में मेरी पहली यात्रा है और मुझे कहना होगा कि यह बहुत पहले हो जानी चाहिए थी।
ग्रीस के नेशनल एंड कापोडिस्ट्रियन यूनिवर्सिटी ऑफ एथेंस में सूचना और दूरसंचार के प्रोफेसर यानिस इओनिडिस ने कहा, "फैसला हमारे हाथ में है। एआई किसी भी अन्य तकनीक की तरह है। एआई एक बहुत अधिक शक्तिशाली तकनीक है जो हमारे दिमाग को प्रभावित करती है लेकिन इसका इस्तेमाल हम पर निर्भर करता है।"
जापानी साहित्य के विद्वान पीटर मैकमिलन ने कहा, "प्राचीन ज्ञान और वर्तमान व भविष्य में इसकी प्रासंगिकता पर इस सम्मेलन में शामिल होने का यह मेरा पहला अवसर है। मेरे जीवन का कार्य प्राचीन संस्कृतियों पर शोध और इस बात पर केंद्रित रहा है कि वे आज के समाज में और भविष्य में अच्छा जीवन जीने में हमारा मार्गदर्शन कैसे कर सकती हैं।"
--आईएएनएस
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