वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर पूरे देश में एक करोड़ से अधिक लोगों ने किया सामूहिक गान
नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गुरुवार को पूरे देश में देशभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की देखरेख में 'नमामि भारतम' कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर में 25,000 से अधिक स्थानों पर एक करोड़ से अधिक छात्र, शिक्षक, अभिभावक और आम नागरिकों ने एक साथ, एक ही समय पर पूरा 'वंदे मातरम' गाया।
यह आयोजन केवल एक सामूहिक गायन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मातृभूमि और राष्ट्रीय चेतना के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक ऐतिहासिक प्रयास था। इस भव्य आयोजन को 'एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' और 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में दर्ज कराने के लिए रिकॉर्ड सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। आयोजकों के अनुसार, 26 लाख स्कूलों तक इस कार्यक्रम की पहुंच रही।
राजधानी दिल्ली में इस कार्यक्रम का विशेष आयोजन सरस्वती बाल मंदिर में किया गया। यहां 1000 से अधिक छात्रों ने अपने शिक्षकों और माता-पिता के साथ मिलकर पूरे छह अंतरे वाला वंदे मातरम गाया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत संघचालक डॉ. अनिल अग्रवाल मुख्य रूप से मौजूद रहे।
डॉ. अनिल अग्रवाल ने कहा, "यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आज सनातन धर्म सरस्वती बाल मंदिर में स्कूल के सभी बच्चों, शिक्षकों और उनके अभिभावकों ने मिलकर भारत माता की स्तुति में यह गीत गाया है। 'वंदे मातरम' एक ऐसा गीत है जो हमें हमारी मातृभूमि, हमारी जन्मभूमि और हमारी संस्कृति से जोड़ता है। इस गीत का 150 साल का गौरवशाली इतिहास आज सबके सामने रखा गया है।"
उन्होंने आगे कहा कि यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि जैसा आज इस विद्यालय में हुआ है, वैसा ही दिल्ली और पूरे भारत के हजारों स्कूलों और कॉलेजों में एक करोड़ से अधिक लोगों ने एक साथ इस गीत को गाया है। हम सभी इस पुनीत कार्य के लिए बधाई के पात्र हैं। इस गीत के माध्यम से समाज में यह जागरूकता पैदा हुई है कि 'भारत मेरी मातृभूमि है, भारत मेरी कर्मभूमि है और इस भूमि के प्रति मेरा कुछ कर्तव्य है'। यही संदेश आज घर-घर तक पहुंचा है।
विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के महासचिव देशराज शर्मा ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्या भारती ने 'वंदे मातरम' गाने के लिए जो दिन चुना है, वह प्रतीकात्मक है। उन्होंने बताया कि विद्या भारती के विद्यालयों में 1952 से ही इसे निरंतर गाया जा रहा है।
इसी क्रम में विद्या भारती दिल्ली प्रांत के जनरल सेक्रेटरी डॉ. सतीश माहेश्वरी ने कहा, "वंदे मातरम हमारा राष्ट्रीय गीत है और सामान्यतः हर विद्यालय में इसे गाया जाता है, लेकिन यदि इसे विशेष अवसरों पर गाया जाए, तो बच्चों में इसके प्रति एक विशेष भावना जागृत होती है। उन्हें लगातार इसके बारे में जानकारी मिलती रहती है और देश में यह जागरूकता फैलती है कि हमारे कर्तव्य क्या हैं, हमें यह स्वतंत्रता कैसे मिली और देश के प्रति हमारे और क्या दायित्व हैं। हम समय-समय पर बच्चों में ये संस्कार डालते रहते हैं, जो रोजमर्रा की दिनचर्या के अलावा एक सराहनीय कदम है। इसलिए यह कदम विशेषकर 150 साल पूरे होने पर एक बहुत अच्छी पहल है। हम वास्तव में इसकी सराहना करते हैं और यह बच्चों के लिए भी एक बहुत अच्छा कार्यक्रम है।"
इस राष्ट्रीय अभियान का असर चंडीगढ़ में भी देखने को मिला। चंडीगढ़ के सेक्टर-40 स्थित शारदा सर्वहितकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 1,200 बच्चों ने सामूहिक गायन में हिस्सा लिया। स्कूल के प्रिंसिपल प्रेम सिंह खेमता ने बताया कि आज का दिन ऐतिहासिक है, क्योंकि देशभर में विद्या भारती के लाखों बच्चे वंदे मातरम के सभी छह पद गा रहे हैं। इसमें माता-पिता और समाज के अन्य लोग भी जुड़ें।
उन्होंने कहा, "यह कार्यक्रम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के लिए किया जा रहा है, क्योंकि एक ही समय में, एक ही धुन और एक ही आवाज में यह गीत देशभर में सामूहिक रूप से गाया गया है।"
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भी 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने के मौके पर लगभग 60 स्थानों पर राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन आयोजित किया गया। इसमें सरस्वती विद्या मंदिर और सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र और शिक्षक शामिल हुए और 'एक समय, एक लय, एक आवाज' के इस देशव्यापी कार्यक्रम का हिस्सा बने।
वहीं, उत्तराखंड के मसूरी में महात्मा योगेश्वर सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में भी वंदे मातरम' का सामूहिक गायन किया गया।
--आईएएनएस
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