'वंदे मातरम' गैरकानूनी या राष्ट्रविरोधी नहीं, यह राष्ट्रभक्ति का प्रतीक : श्याम रजक
पटना, 23 सितंबर (आईएएनएस)। जदयू नेता श्याम रजक ने एसआईआर को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति के दावों पर जारी घमासान, कर्नाटक में 'वंदे मातरम' को लेकर विवाद और जमुई की घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एसआईआर से जुड़े सवालों का जवाब निर्वाचन आयोग से देने की बात कही। वहीं, 'वंदे मातरम' को राष्ट्रभक्ति की भावना से जुड़ा बताते हुए इसके विरोध को लेकर अध्ययन और आत्ममंथन की अपील की।
चुनाव आयुक्तों के बीच असहमति के दावों को लेकर पूछे गए सवाल पर श्याम रजक ने कहा कि इनका जवाब निर्वाचन आयोग ही बेहतर तरीके से दे सकता है। इस मामले पर जवाब देने के लिए वह आयोग के अधिकृत प्रवक्ता नहीं हैं। जिन लोगों ने सवाल उठाए हैं, उनके सवालों का जवाब चुनाव आयोग को ही देना चाहिए, क्योंकि वही इस मामले में अधिकृत संस्था है।
कर्नाटक में 'वंदे मातरम' को लेकर चल रहे विवाद पर श्याम रजक ने कहा कि 'वंदे मातरम' राष्ट्रभक्ति की भावना में समाया हुआ है। देश की आजादी की लड़ाई के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों ने 'वंदे मातरम' का उद्घोष करते हुए अंग्रेजों के खिलाफ जागृति पैदा करने का काम किया था। 'वंदे मातरम' कोई गैरकानूनी या राष्ट्रविरोधी शब्द नहीं है। उन्होंने शरत चंद्र के लेखन का उल्लेख करते हुए कहा कि 'वंदे मातरम' के छह छंद हैं और इसमें राष्ट्रीयता की भावना जागृत होती है। इसे गाने में किसी को अनसुना नहीं करना चाहिए। चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और अशफाक जैसे स्वतंत्रता सेनानियों ने 'वंदे मातरम' का उद्घोष करते हुए आजादी की लड़ाई लड़ी। जो लोग 'वंदे मातरम' के खिलाफ बात करते हैं, उन्हें इन विषयों का अध्ययन और आत्ममंथन करना चाहिए और इन बातों को समझना चाहिए।
बिहार में अपराध को लेकर जीतन राम मांझी के 'जीरो टॉलरेंस' नीति वाले बयान पर श्याम रजक ने कहा कि वह बड़े नेता हैं, इसलिए वह उन पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि, बिहार में जब लालू यादव की सरकार थी, उस समय जीतन राम मांझी भी सरकार में थे। अगर उन्हें उस समय ऐसी स्थिति लगती थी तो उन्हें उसी समय यह बात कहनी चाहिए थी और इस्तीफा देना चाहिए था। लेकिन, अगर अब उनकी नींद खुली है तो यह अच्छी बात है।
जमुई की घटना को लेकर हो रही बयानबाजी पर श्याम रजक ने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है और इससे सभी लोग मर्माहत हैं। ऐसे संवेदनशील मामलों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सत्ता पक्ष, विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं से मिलकर इसका समाधान तलाशने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस बात पर विचार होना चाहिए कि ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जाए, समाज की मानसिकता में किस तरह बदलाव लाया जाए और युवाओं के बीच सकारात्मक बदलाव कैसे लाया जा सकता है।
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