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एशिया और इंडो पैसिफिक में भारत की भूमिका अहम: अर्जेंटीना के राजदूत

नई दिल्ली, 2 जुलाई (आईएएनएस)। भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो काउचिनो ने बदलते वैश्विक माहौल में भारत के बढ़ते कद की ओर दुनिया का ध्यान दिलाया है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भले ही अनिश्चितता बढ़ी हो, लेकिन एक बात पूरी तरह स्पष्ट है कि एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है और इस परिदृश्य में भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में उभरकर सामने आया है।
 

नई दिल्ली, 2 जुलाई (आईएएनएस)। भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो काउचिनो ने बदलते वैश्विक माहौल में भारत के बढ़ते कद की ओर दुनिया का ध्यान दिलाया है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भले ही अनिश्चितता बढ़ी हो, लेकिन एक बात पूरी तरह स्पष्ट है कि एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है और इस परिदृश्य में भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में उभरकर सामने आया है।

नई दिल्ली स्थित फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (एफआईईओ) ऑडिटोरियम में आयोजित भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियाई व्यापार एवं कूटनीतिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए काउचिनो ने कहा, "आज दुनिया का हर राजनयिक संवाद बदलते वैश्विक हालात और अनिश्चितताओं से शुरू होता है, लेकिन इसके साथ ही कुछ नई वास्तविकताएं भी सामने आई हैं, जिनमें एशिया और इंडो-पैसिफिक की बढ़ती भूमिका सबसे प्रमुख है।"

उन्होंने कहा, "भारत जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उसने उसे आज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में शामिल कर दिया है। जनसंख्या के लिहाज से दुनिया के सबसे बड़े देश होने के कारण अब हर देश भारत पर पहले से कहीं अधिक ध्यान दे रहा है।"

भारत और अर्जेंटीना के संबंधों का उल्लेख करते हुए राजदूत ने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से मजबूत कूटनीतिक रिश्ते रहे हैं। उन्होंने बताया कि अर्जेंटीना ने वर्ष 1950 में नई दिल्ली में अपना दूतावास स्थापित किया था और ऐसा करने वाले वह शुरुआती लैटिन अमेरिकी देशों में शामिल था। इसके बाद 2009 में मुंबई में महावाणिज्य दूतावास खोला गया और वर्ष 2019 में दोनों देशों के संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी (स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप)' का दर्जा दिया गया। इसी वर्ष अर्जेंटीना ने नई दिल्ली में अपना कृषि कार्यालय भी स्थापित किया।

काउचिनो ने कहा कि अर्जेंटीना और व्यापक रूप से दक्षिण अमेरिका, भारत की विकास महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है और इस दिशा में अर्थव्यवस्था को अधिक खुला तथा विविधतापूर्ण बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि भारत अब अर्जेंटीना का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है, जो दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ते व्यापार और सहयोग का प्रमाण है। उन्होंने कहा, "भले ही हमारे देश भौगोलिक रूप से काफी दूर हों, लेकिन आपसी हितों के कारण हमारा सहयोग भविष्य में और मजबूत होता रहेगा।"

राजदूत ने यह भी कहा कि दोनों देशों के नीति-निर्माता और कूटनीतिक संस्थान वैश्विक मंच पर भारत के रणनीतिक महत्व को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने भारत को दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बताते हुए कहा कि यह सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था भी है। साथ ही उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की भी सराहना की।

भारत की खाद्य सुरक्षा में अर्जेंटीना के योगदान का उल्लेख करते हुए काउचिनो ने कहा कि उनका देश इस समय भारत को खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। अर्जेंटीना भारत को सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल, दालें और चमड़ा निर्यात करता है। इसके अलावा, लिथियम और तांबा जैसे महत्वपूर्ण खनिज भी दोनों देशों के बीच व्यापार के उभरते हुए प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो रहे हैं।

--आईएएनएस

केआर/