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उत्तराखंड मदरसा फैसले पर पुनर्विचार और राम मंदिर मामले में निष्पक्ष जांच हो: सीमा मलिक

नई दिल्ली, 11 जुलाई (आईएएनएस)। वियतनाम में भारतीय पर्यटकों को लेकर जा रही नाव के पलटने की घटना, उत्तराखंड सरकार द्वारा मदरसों की सरकारी सहायता समाप्त करने के फैसले, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण, असम की बहुविवाह नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे समेत कई मुद्दों पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता सीमा मलिक ने टिप्पणी की। इस दौरान उन्होंने केंद्र और भाजपा सरकार पर कई सवाल खड़े किए।
 

नई दिल्ली, 11 जुलाई (आईएएनएस)। वियतनाम में भारतीय पर्यटकों को लेकर जा रही नाव के पलटने की घटना, उत्तराखंड सरकार द्वारा मदरसों की सरकारी सहायता समाप्त करने के फैसले, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण, असम की बहुविवाह नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे समेत कई मुद्दों पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता सीमा मलिक ने टिप्पणी की। इस दौरान उन्होंने केंद्र और भाजपा सरकार पर कई सवाल खड़े किए।

वियतनाम में भारतीय पर्यटकों से भरी नाव पलटने की घटना में 15 भारतीयों की मौत पर सीमा मलिक ने शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद और स्तब्ध कर देने वाली घटना है। जो लोग अपने परिवार के साथ घूमने गए थे, उनके साथ ऐसा हादसा होना बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस दुख की घड़ी में सभी प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। बचाव अभियान सफल हो और अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके। साथ ही उन्होंने कहा कि हादसे के कारणों की पूरी जानकारी जांच के बाद सामने आएगी।

उत्तराखंड कैबिनेट द्वारा मदरसों को सरकारी अनुदान नहीं देने के फैसले पर सीमा मलिक ने कहा कि सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार अल्पसंख्यकों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है। संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित और संचालित करने का अधिकार देते हैं। ऐसे में यदि मदरसों की सहायता बंद की जाती है तो इसका सबसे अधिक असर गरीब बच्चों की शिक्षा पर पड़ेगा।

सीमा मलिक ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में अल्पसंख्यक समुदाय को मुख्यधारा में लाना चाहती है तो शिक्षा के अवसर बढ़ाने चाहिए, न कि उन्हें सीमित करना चाहिए। इस तरह के फैसले समाज में ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देते हैं।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सीमा मलिक ने कहा कि वह उनके बयानों को गंभीरता से नहीं लेतीं। निशिकांत दुबे अक्सर विवादित बयान देते रहते हैं और उनके आरोपों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं होता। नेहरू-गांधी परिवार के बारे में भाजपा नेताओं के बयानों से वास्तविकता नहीं बदलती और जनता उनके योगदान को अच्छी तरह जानती है।

असम सरकार द्वारा बहुविवाह करने वालों को सरकारी सुविधाओं से वंचित करने के फैसले पर उन्होंने कहा कि बहुविवाह जैसी सामाजिक बुराई का समर्थन कोई नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक समुदाय को निशाना बनाकर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। यदि समाज में कोई कुप्रथा है तो उसे सभी समुदायों के संदर्भ में समान रूप से देखा जाना चाहिए और सुधार के प्रयास भी बिना भेदभाव के किए जाने चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे के दौरान आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों के साथ मिलकर काम करने के बयान पर सीमा मलिक ने समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी दलों को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए। आतंकवाद के खिलाफ किसी भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग का स्वागत किया जाना चाहिए और उनकी पार्टी इस मुद्दे पर सरकार के साथ है।

महिलाओं को लेकर मौलाना साजिद रशदी द्वारा दिए गए विवादित बयान पर सीमा मलिक ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देर से शादी को दुष्कर्म जैसी घटनाओं से जोड़ना पूरी तरह गलत और गैर-जिम्मेदाराना बयान है। देश और दुनिया में कम उम्र की बच्चियों के साथ भी दुष्कर्म की घटनाएं हुई हैं, इसलिए ऐसे अपराधों को शादी की उम्र से जोड़ना उचित नहीं है। लड़कियों की शादी तभी होनी चाहिए जब वे शिक्षित, परिपक्व और अपने निर्णय लेने में सक्षम हों। ऐसी सोच रखने वाले लोगों को समाज और महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है।

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में मंदिर के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी द्वारा इसे कलंक बताए जाने पर सीमा मलिक ने कहा कि यह घटना वास्तव में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट है। यदि कोषाध्यक्ष का कहना है कि वह वित्तीय प्रक्रियाओं में शामिल नहीं थे तो फिर यह सवाल उठता है कि उनकी जिम्मेदारी क्या थी। देशभर के लोगों ने अपनी श्रद्धा से राम मंदिर के लिए दान दिया था और यदि उसमें गड़बड़ी हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि केवल कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी और कुछ लोगों के इस्तीफे से पूरे मामले का सच सामने नहीं आएगा। इस मामले की सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त या वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक और सीबीआई जांच होनी चाहिए। एसआईटी जांच को लेकर लोगों में संतोष नहीं है और नई जांच समिति की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस पूरे मामले में पारदर्शी और स्वतंत्र जांच ही जनता का विश्वास बहाल कर सकती है।

--आईएएनएस

पीएसके/डीकेपी