यूपी विधानसभा चुनाव 2027 : 2022 में सीएम योगी के गढ़ में चला था भगवा जादू, गोरखपुर की सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति में गोरखपुर का विशेष महत्व है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि माने जाने वाले इस जिले में कुल 9 विधानसभा सीटें हैं - कैम्पियरगंज, पिपराइच, गोरखपुर शहरी, गोरखपुर ग्रामीण, सहजनवां, खजनी, चौरी-चौरा, बांसगांव और चिल्लूपार। फिलहाल इन सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा है।
2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने गोरखपुर जिले की सभी 9 सीटों पर जीत हासिल कर विपक्ष का पूरी तरह सफाया कर दिया था। सबसे बड़ी जीत गोरखपुर शहरी सीट से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दर्ज की थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार सुभावती शुक्ला को 1,03,390 वोटों से हराया था। योगी को 1.65 लाख से अधिक वोट मिले, जो जिले की सबसे बड़ी जीतों में शामिल है।
कैम्पियरगंज सीट पर भाजपा के फतेह बहादुर सिंह विजयी रहे। यह सीट लंबे समय से व्यक्तिगत प्रभाव और स्थानीय नेतृत्व के कारण चर्चा में रही है। 2022 में उन्होंने लगभग 42 हजार वोटों से जीत दर्ज की। वहीं पिपराइच सीट से भाजपा के महेंद्र पाल सिंह ने करीब 65 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की।
गोरखपुर ग्रामीण सीट पर भाजपा के विपिन सिंह ने जीत दर्ज की। हालांकि यह सीट अतीत में समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच संघर्ष का केंद्र रही है। 2022 में उन्होंने लगभग 24 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल की। वहीं सहजनवां सीट पर भाजपा के प्रदीप शुक्ला ने करीब 43 हजार वोटों से विजय प्राप्त की।
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित खजनी और बांसगांव सीटों पर भी भाजपा का दबदबा कायम रहा। खजनी से श्रीराम चौहान ने लगभग 37 हजार वोटों से जीत दर्ज की, जबकि बांसगांव से विमलेश पासवान ने करीब 32 हजार वोटों से विजय हासिल की।
चौरी-चौरा सीट पर भाजपा के सरवन कुमार निषाद विधायक बने। उन्होंने लगभग 41 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल की। यह सीट निषाद, राजभर और पिछड़े वर्ग के समीकरणों के कारण हमेशा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
जिले की सबसे चर्चित सीटों में से एक चिल्लूपार है। यह सीट कभी पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के राजनीतिक प्रभाव का केंद्र मानी जाती थी। वर्षों तक यहां तिवारी परिवार और उनके समर्थकों का मजबूत प्रभाव रहा। हालांकि 2022 में भाजपा के राजेश त्रिपाठी ने जीत दर्ज कर इस सीट पर पार्टी की पकड़ मजबूत कर दी। उनकी जीत का अंतर करीब 21,645 वोट रहा।
यदि राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो गोरखपुर शहरी, पिपराइच, सहजनवां और बांसगांव जैसी सीटों पर पिछले एक दशक में भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ा है। दूसरी ओर चिल्लूपार, चौरी-चौरा और कैम्पियरगंज में कभी क्षेत्रीय नेताओं और जातीय समीकरणों की मजबूत भूमिका रही है।
गोरखपुर की राजनीति में ठाकुर, ब्राह्मण, निषाद, दलित, यादव और मुस्लिम वोट बैंक अहम भूमिका निभाते हैं। गोरखपुर शहरी सीट पर भाजपा का मजबूत संगठन और योगी आदित्यनाथ की व्यक्तिगत लोकप्रियता निर्णायक रहती है, जबकि चिल्लूपार, चौरी-चौरा और कैम्पियरगंज जैसी सीटों पर स्थानीय नेताओं की पकड़ चुनावी परिणामों को प्रभावित करती रही है।
वर्तमान समय में गोरखपुर जिले को भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। 2022 में सभी नौ सीटों पर जीत ने इसे और मजबूत किया। सीएम योगी गोरखपुर लोकसभा सीट का नेतृत्व करते रहे थे। उनके सीएम बनने के बाद उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा और इस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी।
--आईएएनएस
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