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उपराष्ट्रपति ने श्रीशक्ति अम्मा के चैरिटेबल कार्यों को सराहा, बोले- शिक्षा, जल और पर्यावरण संरक्षण ही असली दिव्य सेवा

नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को तमिलनाडु के वेल्लोर के श्रीपुरम में श्री शक्ति अम्मा के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लिया और श्री शक्ति अम्मा की 50 साल की आध्यात्मिक यात्रा के इस मौके का हिस्सा बनकर अपार खुशी जाहिर की।
 
उपराष्ट्रपति ने श्रीशक्ति अम्मा के चैरिटेबल कार्यों को सराहा, बोले- शिक्षा, जल और पर्यावरण संरक्षण ही असली दिव्य सेवा

नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को तमिलनाडु के वेल्लोर के श्रीपुरम में श्री शक्ति अम्मा के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लिया और श्री शक्ति अम्मा की 50 साल की आध्यात्मिक यात्रा के इस मौके का हिस्सा बनकर अपार खुशी जाहिर की।

उपराष्ट्रपति ने श्री शक्ति अम्मा के धर्म के प्रति समर्पण पर जोर देते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन आध्यात्मिकता से परे व्यापक सामाजिक सेवा तक फैला हुआ है। उन्होंने श्रीपुरम में की जाने वाली कई तरह की चैरिटेबल गतिविधियों की तारीफ की, जिसमें उच्च शिक्षा पाने वाले छात्रों के लिए स्कॉलरशिप, पानी की कमी वाले इलाकों में पीने के पानी का इंतजाम, छात्रों को साइकिल बांटने जैसी लंबे समय से चली आ रही पहल, और रोजाना अन्नदान कार्यक्रम शामिल हैं, जिसमें हजारों लोगों को खाना खिलाया जाता है। उन्होंने इन पहलों को भक्ति की सच्ची भावना से की गई नेक सेवा बताया।

सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि श्रीपुरम कैंपस के अंदर 50 हजार से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं और पास की कैलासागिरी पहाड़ियों पर कई लाख पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने इसे धरती मां और मानवता के लिए एक बहुत बड़ा योगदान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्यावरण संरक्षण पहलों को मजबूत करने वाला बताया।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना अपने आप में एक तरह की दिव्य सेवा है। सच्ची आध्यात्मिकता प्यार, करुणा और साथी इंसानों की सेवा में है, और उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना भी एक तरह की दिव्य सेवा है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सच्ची आध्यात्मिकता सिर्फ रीति-रिवाजों वाली पूजा में नहीं, बल्कि प्यार, करुणा और साथी इंसानों की सेवा में है। उन्होंने कवि सुब्रमण्यम भारती के शब्दों का जिक्र किया, जिन्होंने कहा था, "प्यार से बढ़कर कोई तपस्या नहीं है।"

उन्होंने कहा कि समाज से प्यार करना और उसकी सेवा करना आध्यात्मिक अनुशासन का सबसे ऊंचा रूप है। उपराष्ट्रपति ने श्री शक्ति अम्मा को आज के समय का एक महान आध्यात्मिक व्यक्तित्व बताया, जो अपने जीवन और कामों से 'प्रेम ही ईश्वर है' के सिद्धांत का उदाहरण पेश करते हैं, और समाज में नेकी और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देते हैं।

इससे पहले दिन में, उपराष्ट्रपति ने तमिलनाडु के वेल्लोर के श्रीपुरम में श्री नारायणी मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने सभी के लिए शांति, समृद्धि और खुशी के लिए देवी लक्ष्मी से प्रार्थना की।

--आईएएनएस

एसएके/डीकेपी