यूपीआई पर एमडीआर को लेकर सियासत तेज: कांग्रेस का आरोप- अमेरिकी लॉबी के दबाव में फैसला
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लगाने की चर्चा को लेकर केंद्र सरकार पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर अमेरिकी कंपनियों के दबाव में आम लोगों के खिलाफ फैसला लेने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा, "अमेरिकी लॉबी के दबाव में एमडीआर लागू करना पूरी तरह से आम लोगों के खिलाफ कदम है। आम नागरिक को क्यों परेशान किया जा रहा है? एमडीआर का बोझ उन लोगों पर क्यों डाला जा रहा है जो अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं, जबकि इसका खर्च बड़ी-बड़ी वित्तीय कंपनियों को उठाना चाहिए?"
उन्होंने आगे लिखा, "हमें ऐसा प्रधानमंत्री चाहिए जो वैश्विक दबावों के सामने डटकर खड़ा हो सके, खासकर तब जब उनकी मांगें गरीब और मध्यम वर्गीय भारतीयों के हितों के खिलाफ हों; न कि ऐसा प्रधानमंत्री जो पूरी तरह से समझौता कर चुका हो।"
इससे पहले राहुल गांधी ने भी इसी मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा था, "मोदी सरकार ने चुपचाप यूपीआई पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है। अब 2,000 रुपए से ऊपर के मर्चेंट यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर लगाया जा सकता है।"
राहुल गांधी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ 5 प्रतिशत हो, लेकिन यूपीआई के कुल ट्रांजैक्शन वैक्यू का करीब 65 प्रतिशत इन्हीं में है। सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फीस नहीं ली जाएगी, लेकिन सवाल उठता है कि दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से ही वसूली होगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं और अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।
--आईएएनएस
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