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यूपी एसटीएफ-मुंबई पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, साइबर ठगों को सिम सप्लाई करने वाला आरोपी गिरफ्तार

मुंबई, 9 जनवरी (आईएएनएस)। साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंबई क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) ने उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (यूपी एसटीएफ) के सहयोग से एक बड़ी सफलता हासिल की। टीम ने संयुक्त ऑपरेशन में 50 हजार रुपए के इनामी और साइबर ठगों को सिम कार्ड सप्लाई करने वाले गिरोह के कथित सदस्य सिहान शेख (35) को गिरफ्तार किया है।
 
यूपी एसटीएफ-मुंबई पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, साइबर ठगों को सिम सप्लाई करने वाला आरोपी गिरफ्तार

मुंबई, 9 जनवरी (आईएएनएस)। साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंबई क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) ने उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (यूपी एसटीएफ) के सहयोग से एक बड़ी सफलता हासिल की। टीम ने संयुक्त ऑपरेशन में 50 हजार रुपए के इनामी और साइबर ठगों को सिम कार्ड सप्लाई करने वाले गिरोह के कथित सदस्य सिहान शेख (35) को गिरफ्तार किया है।

मुंबई पुलिस की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, यूपी के प्रतापगढ़ का रहने वाला सिहान शेख पिछले करीब 25 सालों से मुंबई में रह रहा था। उस पर जाली दस्तावेजों के जरिए अपने गृह जनपद प्रतापगढ़ से 10 हजार से अधिक सिम कार्ड हासिल कर उन्हें देश-विदेश में सक्रिय साइबर अपराधियों को बेचने का आरोप है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि इन सिम कार्ड को ऊंची कीमतों पर विदेशी नागरिकों को बेचा गया।

पुलिस का कहना है कि बड़ी संख्या में ये सिम कार्ड लाओस, थाईलैंड और कंबोडिया से संचालित साइबर क्राइम सिंडिकेट्स तक पहुंचाए गए। इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन शेयर मार्केट ट्रेडिंग के नाम पर ठगी, पार्सल फ्रॉड और गेमिंग ऐप्स से जुड़े घोटालों में किया जा रहा था।

जानकारी के अनुसार, यूपी पुलिस को इनपुट मिला था कि सिहान शेख मुंबई के कोलाबा इलाके में छिपा हुआ है। इस सूचना के आधार पर उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया और इसके बाद मुंबई सीआईयू और यूपी एसटीएफ की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को आगे की जांच के लिए यूपी एसटीएफ को सौंप दिया गया है।

पुलिस की मानें तो, सिहान शेख एक टूर एंड ट्रैवल्स कंपनी में काम करता था और लंबे समय तक कानून की नजरों से बचने में कामयाब रहा। वह बेहद शातिर तरीके से काम करता था और अपने नाम पर कभी भी कोई मोबाइल फोन या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट रजिस्टर नहीं कराता था। जांच में सामने आया है कि वह अपने एक दोस्त के नाम पर रजिस्टर्ड फोन और सिम कार्ड का इस्तेमाल करता था, ताकि पुलिस और अन्य एजेंसियों को चकमा दिया जा सके।

--आईएएनएस

पीएसके