यूपी की तरह दिल्ली में भी नफरत का माहौल बनाकर मुसलमानों को दी जा रही तकलीफ: अबू आजमी
मुंबई, 23 सितंबर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आजमी ने देश में कथित तौर पर बढ़ते नफरत के माहौल, मस्जिदों और झुग्गियों पर कार्रवाई तथा उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर मुसलमानों को तकलीफ देकर बहुसंख्यक समुदाय को राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जा रही है।
अबू आजमी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि कुछ लोग नफरत की राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं और संबंधित संस्थाएं उनके 'इंस्ट्रूमेंट' की तरह काम कर रही हैं।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से ऐसे मामलों को गंभीरता से लेने और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी नजर रखने की मांग की। लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह की परिस्थितियां चिंता का विषय हैं।
मस्जिदों और अवैध निर्माण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई होनी है तो नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
उन्होंने दिल्ली के कई इलाकों में कथित अवैध निर्माण का हवाला देते हुए कहा कि केवल मस्जिदों को निशाना बनाकर कार्रवाई करने से गलत संदेश जाता है। उनका आरोप था कि ऐसी कार्रवाइयों से देश की एकता और भाईचारे पर असर पड़ता है।
उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अबू आजमी ने कहा कि राज्य में लूट, हत्या और अन्य अपराधों की घटनाएं चिंता का विषय हैं। उन्होंने एनकाउंटर की कार्रवाई पर भी सवाल उठाया और निष्पक्ष जांच तथा कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि आपराधिक मामलों की सुनवाई तय समयसीमा में पूरी करने के लिए अतिरिक्त अदालतें और जरूरत पड़ने पर रात में सुनवाई जैसी व्यवस्था की जानी चाहिए।
आजमी ने महाराष्ट्र में नशे की समस्या का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो पुलिस को सख्ती के निर्देश देकर नशे के नेटवर्क पर कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने हर पुलिस थाने में नशे के खिलाफ विशेष यूनिट बनाने और नशे की बिक्री के नेटवर्क तक पहुंचने की मांग की।
झुग्गी-बस्तियों के पुनर्विकास और 14 फीट से अधिक ऊंचाई वाले निर्माण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कार्रवाई से पहले वहां रहने वाले लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई लोगों के पास राशन कार्ड, आधार कार्ड, मतदाता पहचान और बिजली-पानी के कनेक्शन जैसे दस्तावेज हैं। ऐसे लोगों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हटाना उचित नहीं होगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि पुनर्वास और आवास की व्यवस्था करने के बाद ही किसी तरह की कार्रवाई की जाए।
--आईएएनएस
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