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यूपी: जेल से रिहा होते ही आजम खां और अब्दुल्ला आजम को ईडी ने हिरासत में लिया

रामपुर, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता और पूर्व मंत्री आजम खां के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने उत्तर प्रदेश के रामपुर में जिला जेल से बाहर आते ही आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को हिरासत में ले लिया।
 

रामपुर, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता और पूर्व मंत्री आजम खां के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने उत्तर प्रदेश के रामपुर में जिला जेल से बाहर आते ही आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को हिरासत में ले लिया।

ईडी की तरफ से जारी बयान में बताया गया, "हमने आजम खां को हिरासत में ले लिया है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद हम उसे गिरफ्तार करेंगे और गाजियाबाद पीएमएलए कोर्ट में पेश करेंगे।"

उधर, जेल के बाहर सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ लगातार बढ़ती रही। स्थिति को देखते हुए पुलिस-प्रशासन अलर्ट हो गया और आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।

बता दें कि आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम पैन कार्ड वाले मामले में रिहा हुए थे, तभी ईडी ने उन पर यह कार्रवाई की।

इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 29 अक्टूबर को दो पैन कार्ड रखने के मामले में आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत दी थी। अदालत ने दोनों की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए उनकी सजा निलंबित कर दी। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी गई।

न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने दोनों की पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। याचिकाओं में अधीनस्थ अदालतों द्वारा दो पैन कार्ड रखने के मामले में सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को चुनौती दी गई थी।

अभियोजन के अनुसार, यह मामला कथित तौर पर अलग-अलग जन्मतिथियों का उल्लेख करने वाले दूसरे पैन कार्ड को बनवाने और उसके इस्तेमाल से जुड़ा है। आरोपों में चुनावी नामांकन पत्रों में दूसरे पैन कार्ड के कथित इस्तेमाल का पहलू भी शामिल है। आजम खां और अब्दुल्ला आजम ने निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा के फैसले को आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं के जरिए हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इसी क्रम में दोनों ने सजा निलंबित करने और जमानत देने की मांग की थी।

दोषसिद्धि पर रोक और सजा निलंबन में हाई कोर्ट ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर की, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी। ऐसे में दोषसिद्धि का आदेश बरकरार रहेगा। पुनरीक्षण याचिकाओं पर अंतिम फैसला अलग से होना है।

--आईएएनएस

एमएस/डीकेपी