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यूपी चुनाव 2027 : उन्नाव की छह विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा

उन्नाव, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं। सूबे की एक-एक सीट के लिए दलों में आपसी खींचतान हो रही है। ऐसे में लखनऊ-कानपुर के बीच बसा उन्नाव जिला और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि जिले में विधानसभा की 6 सीटें हैं।
 

उन्नाव, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं। सूबे की एक-एक सीट के लिए दलों में आपसी खींचतान हो रही है। ऐसे में लखनऊ-कानपुर के बीच बसा उन्नाव जिला और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि जिले में विधानसभा की 6 सीटें हैं।

उन्नाव की छह सीटों में बांगरमऊ, सफीपुर, मोहान, उन्नाव सदर, भगवंत नगर और पुरवा शामिल हैं। वर्तमान में इन सभी छह सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है, जो इसे भाजपा का अभेद्य किला बनाता है। जिले के मौजूदा राजनीतिक समीकरण की बात करें तो बांगरमऊ से श्रीकांत कटियार, सफीपुर से बंबा लाल दिवाकर, मोहान से बृजेश कुमार रावत, उन्नाव सदर से पंकज गुप्ता, भगवंतनगर से आशुतोष शुक्ला और पुरवा से अनिल कुमार सिंह विधायक हैं।

प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, उन्नाव जिले का कुल क्षेत्रफल 4,558 वर्ग किलोमीटर है। 2011 की जनगणना के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, जिले की कुल जनसंख्या 31,08,367 है। प्रशासनिक दृष्टि से जिले में छह तहसीलें, 16 विकास खंड, 1,044 ग्राम पंचायतें और 18 नगर पालिका व पंचायतें हैं, जबकि कानून-व्यवस्था के लिए 21 पुलिस थाने स्थापित हैं। जिले की साक्षरता दर 66.37 प्रतिशत है और लिंगानुपात 907 है।

जिले का नाम इसके मुख्यालय शहर उन्नाव पर पड़ा है। कहा जाता है कि लगभग 1,200 साल पहले यह पूरा क्षेत्र घने जंगलों से ढका हुआ था। चौहान राजपूत गोडो सिंह ने इन जंगलों को साफ कर एक शहर बसाया, जिसका नाम सवाई गोडो रखा गया, जो बाद में उन्नाव बना। प्राचीन काल में यह क्षेत्र कोसल राज्य का हिस्सा था और बाद में अवध के सूबे में शामिल किया गया।

जिले में कई जगहों पर मिले प्राचीन अवशेष इसकी पुरातनता की गवाही देते हैं, बांगरमऊ परगना के रामकोट गांव में भी ऐसे अवशेष मिले हैं। 1857-58 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद जब सत्ता ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश क्राउन के पास गई, तो उन्नाव को एक स्वतंत्र जिले के रूप में स्थापित किया गया। 1869 में जिले ने अपना वर्तमान स्वरूप ग्रहण किया और उसी साल उन्नाव शहर को नगर पालिका बनाया गया।

उन्नाव का प्रमुख उद्योग टैनिंग है। यह जिला अपने लेदर उद्योग और लेदर के सामानों के लिए पूरे देश में जाना जाता है और कानपुर के बाद उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा लेदर हब माना जाता है।

कनेक्टिविटी के लिहाज से उन्नाव बेहद मजबूत स्थिति में है। सड़क मार्ग से यह एनएच-31, एनएच-27, एसएच-38 और एसएच-58 जैसे प्रमुख राजमार्गों पर स्थित है, जो इसे लखनऊ, कानपुर, रायबरेली और नोएडा से जोड़ते हैं। रेल मार्ग में उन्नाव जंक्शन मुख्य स्टेशन है, जहां से देश के प्रमुख शहरों के लिए नियमित ट्रेनें हैं। हवाई मार्ग के लिए लोग कानपुर हवाई अड्डे और लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे का उपयोग करते हैं।

उन्नाव की सांस्कृतिक पहचान हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक तकिया मेला है, जो हर साल बड़ी धूमधाम से लगता है। वहीं, प्रकृति प्रेमियों के लिए जिले में शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी अभयारण्य है, जिसे पहले नवाबगंज पक्षी अभयारण्य के नाम से जाना जाता था। यह कानपुर-लखनऊ राजमार्ग पर स्थित है और झील व आर्द्रभूमि से घिरा है। यहां साइबेरिया सहित सीआईएस देशों से आने वाली 250 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं। अभयारण्य परिसर में हिरण पार्क, वॉच टावर और बोटिंग की सुविधा भी है।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम