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यूपी कैबिनेट से 'री-यूज वाटर’ नीति को मंजूरी, लैंड यूज प्रक्रिया सरल कर निवेश को बढ़ावा

लखनऊ, 23 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में जल प्रबंधन और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए दो अहम फैसले लिए गए। राज्य सरकार ने जहां ‘सेफ री-यूज ट्रीटेड वाटर पॉलिसी’ को मंजूरी देकर जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है, वहीं राजस्व संहिता में संशोधन कर लैंड यूज परिवर्तन की प्रक्रिया को आसान बना दिया है।
 
यूपी कैबिनेट से 'री-यूज वाटर’ नीति को मंजूरी, लैंड यूज प्रक्रिया सरल कर निवेश को बढ़ावा

लखनऊ, 23 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में जल प्रबंधन और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए दो अहम फैसले लिए गए। राज्य सरकार ने जहां ‘सेफ री-यूज ट्रीटेड वाटर पॉलिसी’ को मंजूरी देकर जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है, वहीं राजस्व संहिता में संशोधन कर लैंड यूज परिवर्तन की प्रक्रिया को आसान बना दिया है।

प्रदेश सरकार ने बढ़ती जल मांग और घटते संसाधनों को ध्यान में रखते हुए शोधित जल (ट्रीटेड वॉटर) के सुरक्षित पुनः उपयोग की नीति को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत घरों और उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को शोधन के बाद दोबारा उपयोग में लाया जाएगा, जिससे पेयजल पर निर्भरता कम होगी और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

नई नीति के अनुसार, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) के जरिए अपशिष्ट जल को शोधित कर चरणबद्ध तरीके से उपयोग में लाया जाएगा। पहले चरण में इस पानी का उपयोग नगर निकायों, निर्माण कार्यों, बागवानी और सिंचाई में किया जाएगा। दूसरे चरण में इसे उद्योग, कृषि और रेलवे जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाएगा। तीसरे चरण में ड्यूल पाइप सिस्टम के माध्यम से घरों तक गैर-पीने योग्य उपयोग के लिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

सरकार का मानना है कि इस पहल से जहां एक ओर स्वच्छ पेयजल की बचत होगी, वहीं जल निकायों में प्रदूषण कम होगा और ऊर्जा खपत में भी कमी आएगी। साथ ही, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक और टिकाऊ बनाया जा सकेगा। कैबिनेट ने इसके साथ ही उप्र राजस्व संहिता, 2006 की धारा 80 में संशोधन के लिए अध्यादेश 2026 को भी मंजूरी दी है।

इस फैसले से विकास प्राधिकरणों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधीन क्षेत्रों में लैंड यूज परिवर्तन की प्रक्रिया को सरल बना दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब यदि किसी भूखंड का नक्शा संबंधित प्राधिकरण द्वारा पास हो जाता है तो उसे स्वतः ही भूमि उपयोग परिवर्तन माना जाएगा। इससे पहले लोगों को अलग से लैंड यूज बदलवाने और फिर नक्शा पास कराने की दोहरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की अधिक खपत होती थी।

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि नई व्यवस्था में सभी औपचारिकताएं नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में ही समाहित कर दी गई हैं। इससे आमजन को राहत मिलने के साथ-साथ निवेशकों के लिए प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल बनेगी।

--आईएएनएस

विकेटी/डीकेपी