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यूपी 2027 चुनाव : नवाबों के शहर से सियासत के पावर सेंटर तक, 2022 में लखनऊ बना भाजपा का अभेद्य दुर्ग

नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी है और यह हमेशा से एक बहुसांस्कृतिक शहर रहा है। लखनऊ शहर शिया नवाबों द्वारा संरक्षित सभ्य रूप से शिष्टाचार, सुंदर उद्यान, कविता, संगीत और लजीज भोजन के लिए भारतीयों और दक्षिण एशियाई संस्कृति और इतिहास के छात्रों में अच्छी तरह से जाना जाता है। लेकिन यह भी झुठलाया नहीं जा सकता कि यह प्रदेश के साथ-साथ केंद्रीय चुनाव में एक राजनीतिक अखाड़ा रहा है।
 

नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी है और यह हमेशा से एक बहुसांस्कृतिक शहर रहा है। लखनऊ शहर शिया नवाबों द्वारा संरक्षित सभ्य रूप से शिष्टाचार, सुंदर उद्यान, कविता, संगीत और लजीज भोजन के लिए भारतीयों और दक्षिण एशियाई संस्कृति और इतिहास के छात्रों में अच्छी तरह से जाना जाता है। लेकिन यह भी झुठलाया नहीं जा सकता कि यह प्रदेश के साथ-साथ केंद्रीय चुनाव में एक राजनीतिक अखाड़ा रहा है।

माना जाता है कि केंद्र की सत्ता की चाबी यूपी में है, ऐसे में यूपी की राजधानी लखनऊ में इसकी भूमिका अहम हो जाती है। विधानसभा हो या लोकसभा लखनऊ की जनता इसमें अहम भूमिका निभाती रही है। जहां पर 2027 चुनाव के लिए राजनीतिक पार्टियों में एक-एक सीट की जद्दोजहद देखने को मिल रही है, ऐसे में 9 विधानसभा सीट वाला लखनऊ भी खास हो जाता है।

प्रदेश की राजधानी लखनऊ का कुल क्षेत्रफल 2,528 वर्ग किमी है, जहां कुल आबादी लगभग 45,89,838 है। यहां मुख्य रूप से हिंदी और उर्दू भाषाएं बोली जाती हैं। प्रशासनिक दृष्टि से जिले में 5 तहसीलें और 8 ब्लॉक हैं, जबकि जिले में कुल 961 गांव आते हैं। तेजी से बढ़ता शहरीकरण और ग्रामीण अंचल का संगम ही लखनऊ की सबसे बड़ी ताकत है।

प्राचीन काल से लेकर नवाबों के शासनकाल तक, लखनऊ ने एक गहरा परिवर्तन देखा है, जो मुगल और इंडो-यूरोपीय वास्तुकला के संयोजन से एक जीवंत, वैश्विक शहर में विकसित हुआ है। अवध की एक समय में शांत राजधानी अब एक समृद्ध महानगर में खिल गई है, जो आधुनिकता को अपनाते हुए अपने ऐतिहासिक अतीत का सार संरक्षित करती है। वर्तमान परिदृश्य में आधुनिक उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विस्तृत सचिवालय, विधान सभा और कई सरकारी संस्थान हैं।

शहर की दृश्यावली शॉपिंग मॉल, उच्च श्रेणी के आवासीय परिसरों और कुशल मेट्रो रेल प्रणाली के आगमन से परिवर्तित हुई है, जिसने संपर्क को सुव्यवस्थित और विकास को सुगम बनाया है। वाणिज्य, शिक्षा और संस्कृति के केंद्र के रूप में, लखनऊ देश भर से आगंतुकों और यहां के निवासियों को आकर्षित करता है।

लखनऊ की प्रसिद्ध आतिथ्य कला, जो उसके पारंपरिक अवधी व्यंजन और गर्मजोशी भरे स्वागत में निहित है, यात्रियों एवं पर्यटकों को आज भी सम्मोहित करती है। बड़े इमामबाड़े की महानता से लेकर गोमती नगर नदी तट की आधुनिक वास्तुकला तक, लखनऊ की आकाशरेखा अपने अनुकूलन और प्रगति की क्षमता का साक्ष्य है।

नगरीकरण की अनिवार्य चुनौतियों के बावजूद लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत अक्षुण्ण है, जिसके लिए ऐतिहासिक स्मारकों और पारंपरिक चिकन कारीगरों की कार्यशालाओं को संरक्षित करने के सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। इस समकालीन युग में, लखनऊ भारत के नगरीय पुनर्जागरण के एक जीवंत उदाहरण के रूप में स्थापित है, जहां प्राचीन परंपराएं और आधुनिक आकांक्षाएं निर्बाध रूप से मिलकर इस शहर की अद्वितीय पहचान बनाती हैं जो इसके अतीत को सम्मानित करती है और एक उज्ज्वल भविष्य को प्रतिबिंबित करती है।

लखनऊ पर्यटन के लिहाज से भी बेहद समृद्ध है। यहां ला मार्टिनियर कॉलेज, ऑल सेंट्स गैरिसन चर्च, हनुमान मंदिर, अलीगंज, सआदत अली खान का मकबरा, नादान महल, सिकंदरबाग, इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद, जो नवाब अमजद अली शाह का मकबरा है, बिबियापुर कोठी, दिलकुशा महल और छोटा इमामबाड़ा जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल हैं, जहां हर ईंट इतिहास का एक किस्सा कहती है।

कनेक्टिविटी के मामले में भी लखनऊ बेहद मजबूत है। हवाई मार्ग की बात करें तो लखनऊ का चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा अमौसी में स्थित है, जो शहर के केंद्र से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। यहां से दिल्ली, मुंबई, पटना, रांची और वाराणसी के लिए दैनिक उड़ानें उपलब्ध हैं। रेल मार्ग से लखनऊ उत्तरी और पूर्वोत्तर रेलवे नेटवर्क का बड़ा केंद्र है। चारबाग स्टेशन शहर के केंद्र से 3 किमी की दूरी पर स्थित है। सड़क मार्ग से लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग 24, 25 और 28 के चौराहे पर है। यह आगरा 363 किमी, प्रयागराज 225 किमी, कोलकाता 985 किमी, दिल्ली 497 किमी, कानपुर 79 किमी और वाराणसी 305 किमी जैसे प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

सियासी तौर पर लखनऊ का गणित बेहद अहम है। लखनऊ जिले में दो लोकसभा सीटें हैं। लखनऊ संसदीय क्षेत्र से राजनाथ सिंह और मोहनलाल गंज सीट से कौशल किशोर सांसद हैं, दोनों भारतीय जनता पार्टी से हैं। वहीं, जिले में 9 विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें से सात पर भाजपा और दो पर समाजवादी पार्टी काबिज हैं।

लखनऊ के विधायकों में मलिहाबाद से जय देवी, बख्शी का तालाब से योगेश शुक्ला, सरोजनी नगर से राजेश्वर सिंह, लखनऊ उत्तर से डॉ. नीरज बोरा, लखनऊ पूर्व से आशुतोष टंडन गोपाल, लखनऊ कैंट से बृजेश पाठक और मोहनलालगंज से अमरेश कुमार भाजपा के टिकट पर 2022 के चुनाव जीते हैं। वहीं, लखनऊ पश्चिम से अरमान खान और लखनऊ मध्य से रविदास मेहरोत्रा समाजवादी पार्टी से विधायक हैं।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम