'उनका वजन अपनी प्रतिद्वंद्वी से 700 ग्राम ज्यादा था,' कोच ने बताया एमएमए फाइटर सुचिका की हार का कारण
नागोया, 21 सितंबर (आईएएनएस)। सुचिका तारियाल का ऐतिहासिक एशियाई गेम्स मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) सफर एक विवादित सेमीफाइनल हार के बाद ब्रॉन्ज मेडल के साथ खत्म हुआ। कोच निखिल कुंदर ने बताया कि आखिरकार नतीजे का फैसला 'कम वजन वाले खिलाड़ी' के नियम से हुआ, क्योंकि आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) के बाद मुकाबला ड्रॉ घोषित कर दिया गया था।
शुरुआत में सुचिका को सिंगापुर की हुई हून टेओ के विरुद्ध हार मिली थी, जिसके बाद भारतीय टीम ने इस फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। विरोध के बाद मुकाबला आर्बिट्रेशन में गया, जहां जजों ने मुकाबले की समीक्षा की और दोबारा स्कोरिंग की। कुंदर ने कहा कि दोबारा मूल्यांकन से कोई विजेता नहीं निकला, नतीजा टाई रहा और वजन का नियम लागू हो गया।
कुंदर ने कहा, "हमें भरोसा था कि सुचिका ने फाइट जीत ली है। नियम के मुताबिक, जब आर्बिट्रेशन होता है, तो हम तीन जज चुनते हैं। उन तीन जजों को मुकाबले को दोबारा स्कोर करने का मौका मिलता है। जब उन्होंने दोबारा स्कोरिंग की, तो इसे ड्रॉ घोषित कर दिया गया।"
उन्होंने बताया कि जब मुकाबला ड्रॉ घोषित हो गया, तो सिंगापुर के पास दो विकल्प थे: या तो वे काउंटर-आर्बिट्रेशन (जवाबी मध्यस्थता) के लिए जाते या एशियन मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स एसोसिएशन (एएमएमए) के नियमों के तहत वजन के आधार पर फैसला लेते।
"अब जब यह ड्रॉ हो गया, तो विरोधी टीम के पास एक विकल्प था। वे या तो काउंटर-आर्बिट्रेशन के लिए जा सकते थे या वजन के आधार पर फैसला चुन सकते थे। ये एशियन मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स एसोसिएशन (एएमएमए) के नियम हैं। यह एएमएमए फेडरेशन के नियमों के अनुसार है। सिंगापुर ने काउंटर-आर्बिट्रेशन के लिए न जाकर कम वजन वाले खिलाड़ी का विकल्प चुना। दुर्भाग्य से, सुचिका उनसे 700 ग्राम भारी थी। और इसी आधार पर, यह मैच उनकी प्रतिद्वंद्वी को दे दिया गया।"
कुंदर का मानना था कि वजन के आधार पर आया नतीजा फाइट के दौरान सुचिका के प्रदर्शन के उनके आकलन से मेल नहीं खाता था। उन्होंने कहा, "अगर आप फाइट की तकनीकी बारीकियों और स्कोरिंग को देखें, तो सुचिका जीती थीं।"
सेमीफाइनल के नतीजे के बावजूद, सुचिका ने एमएमए में भारत के लिए पहला एशियन गेम्स मेडल जीता। 36 वर्षीय सुचिका, जो जूडो, कुराश और फाइटिंग जिउ-जित्सु में हिस्सा ले चुकी हैं, उन्होंने इससे पहले क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलमा को 2-0 से हराकर अंतिम चार में अपनी जगह पक्की की थी।
एमएमए उन खेलों में शामिल है जो आइची-नागोया में एशियन गेम्स में पहली बार शामिल किए गए हैं, इसलिए सुचिका का ब्रॉन्ज मेडल भारतीय कॉम्बैट स्पोर्ट्स के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
--आईएएनएस
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