उमर खालिद ने अंतरिम जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का किया रुख, निचली अदालत के फैसले को दी चुनौती
नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। 2020 के दिल्ली दंगे की साजिश के मामले में यूएपीए के तहत गिरफ्तार पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद ने अंतरिम जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। उमर खालिद ने कड़कड़डूमा कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा। उमर खालिद ने अपने दिवंगत मामा के चेहलुम में शामिल होने और बीमार मां की देखभाल के लिए 15 दिनों की अंतरिम जमानत मांगी है।
इससे पहले कड़कड़डूमा कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि अंतरिम जमानत के लिए दिए गए कारण उचित और संतोषजनक नहीं हैं।
उमर खालिद ने निचली अदालत में दलील दी थी कि उनके परिवार में पिता, मां और पांच बहनें हैं, लेकिन 71 वर्षीय पिता मां की देखभाल करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि उनकी चार बहनें शादीशुदा हैं और अलग-अलग जगहों पर रहती हैं। ऐसे में परिवार के सबसे बड़े और इकलौते बेटे होने के नाते वही अपनी मां की सर्जरी से पहले और बाद में देखभाल कर सकते हैं।
याचिका में यह भी कहा गया था कि उमर खालिद को पहले भी कई बार अंतरिम जमानत मिल चुकी है और उन्होंने हर बार अदालत की सभी शर्तों का पालन करते हुए समय पर सरेंडर किया।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी थी कि सह-आरोपी तस्लीम अहमद, शिफा उर रहमान और अथर खान को भी पारिवारिक बीमारी जैसे आधारों पर अंतरिम जमानत मिली, इसलिए समानता के आधार पर उमर खालिद को भी राहत मिलनी चाहिए।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि आरोपी अदालत की नरमी का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामा का चेहलुम करीबी रिश्तेदारों की श्रेणी में नहीं आता और परिवार के अन्य सदस्य भी इस रस्म को पूरा कर सकते हैं। साथ ही मां की सर्जरी को गंभीर नहीं बताते हुए कहा गया कि परिवार के अन्य सदस्य उनकी देखभाल कर सकते हैं।
फिलहाल, उमर खालिद 2020 दिल्ली दंगा साजिश मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।
--आईएएनएस
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