उज्जैन शाही मस्जिद विवाद पर मुस्लिम पक्ष दो सुर: एक ने दी खून बहाने की चेतावनी, दूसरे ने कहा- मस्जिद महफूज है
नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन की ऐतिहासिक धरोहर और विकास की योजना आमने-सामने आ गई हैं। शहर की 630 साल पुरानी शाही मस्जिद को लेकर शुरू हुआ सड़क चौड़ीकरण का मामला अब देखते ही देखते कानून-व्यवस्था और आस्था की बहस में तब्दील हो गया, जहां भारी पुलिस की तैनाती से माहौल किसी छावनी जैसा बना हुआ है। एक तरफ मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि चुनिंदा धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ प्रशासन और कोर्ट में चल रही सुनवाई ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का भरोसा दिलाया है, लेकिन जमीन पर तनाव बरकरार है।
तहरीक मुस्लिम शब्बान के प्रेसिडेंट मौलाना मुश्ताक मलिक ने कहा, "हिंदू कुंभ मेले के लिए उज्जैन की 630 साल पुरानी ऐतिहासिक शाही मस्जिद को गिराने की कोशिश की जा रही थी। आखिर में सिर्फ तीन फीट बढ़ाने पर फैसला हुआ। अब अगर तीन फीट और बढ़ाया गया, तो समझ लीजिए कि सड़क चौड़ी होगी, जबकि उसके आगे एक मंदिर भी है। लेकिन मंदिर को कोई खतरा नहीं दिख रहा है, जो अभी-अभी बना है।"
मौलाना मुश्ताक ने आगे कहा कि वैसे भी, हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात थे, जिससे ऐसा लग रहा था जैसे बॉर्डर पर जंग हो रही हो। यही नहीं मुश्ताक ने मस्जिद गिराए जाने की कोशिश को लेकर विवादित और हिंसात्मक बयान भी दिया।
इसके अलावा, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा, "मस्जिद को न तो तोड़ा जाएगा, न ही कोई उसे छू रहा है, न ही उसे कोई नुकसान पहुंचाया जाएगा। कोर्ट में तत्काल सुनवाई के दौरान भी दलीलें पेश की गईं, जहां एक रिप्रेजेंटेटिव कमेटी के दो लोग अलग-अलग गए। एक पिटीशन पहले फाइल की गई थी, और दूसरी पिटीशन तत्काल सुनवाई के लिए गई।"
उन्होंने कहा कि यह किसने किया और कैसे हुआ, यह बाद की बात है। जनता दो दिन से वहां बैठी थी, और जो लोग वहां बैठे थे, उन्होंने ऐसा नहीं किया। यह किसने किया और कैसे हुआ, इसकी जांच बाद में की जाएगी। अभी के लिए, स्थिति यह है कि लोग प्रतिनिधि समिति और काजी की अपील का पालन करें। जब तक वे कोई घोषणा नहीं करते, तब तक कोई दूसरा विरोध प्रदर्शन न करे। मस्जिद में कोई दखल नहीं दिया जाएगा, और हम पूरा सहयोग करेंगे।
--आईएएनएस
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