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उज्जैन: पश्चिम बंगाल के मंत्री उमेश राय का भरोसा, राज्य में पुजारियों के मानदेय करेंगे बहाल

उज्जैन, 13 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में मंदिरों के पुजारियों के मानदेय को लेकर चल रहे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल सरकार के शहरी विकास राज्यमंत्री उमेश राय ने शनिवार को महाकाल मंदिर के पुजारियों से मुलाकात की। इस दौरान पुजारियों के मानदेय को बहाल करने की मांग रखी गई। उन्होंने पुजारियों को भरोसा जिलाया कि मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी से बातचीत कर पुजारियों का मानदेय बहाल किया जाएगा। महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि मंत्री उमेश राय ने मुख्यमंत्री से इस विषय पर चर्चा कर उचित समाधान निकालने और पुजारियों की व्यवस्थाओं को मजबूत करने का आश्वासन दिया है।
 

उज्जैन, 13 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में मंदिरों के पुजारियों के मानदेय को लेकर चल रहे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल सरकार के शहरी विकास राज्यमंत्री उमेश राय ने शनिवार को महाकाल मंदिर के पुजारियों से मुलाकात की। इस दौरान पुजारियों के मानदेय को बहाल करने की मांग रखी गई। उन्होंने पुजारियों को भरोसा जिलाया कि मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी से बातचीत कर पुजारियों का मानदेय बहाल किया जाएगा। महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि मंत्री उमेश राय ने मुख्यमंत्री से इस विषय पर चर्चा कर उचित समाधान निकालने और पुजारियों की व्यवस्थाओं को मजबूत करने का आश्वासन दिया है।

महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल में वर्तमान सरकार को वे सनातन धर्म के प्रति आस्था रखने वाली सरकार मानते हैं। हालांकि, सरकार बनने के बाद मस्जिदों के मौलवियों और मंदिरों के पुजारियों का वेतन बंद किए जाने का निर्णय लिया गया, जिससे मंदिरों की नियमित पूजा-पद्धति प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई। मेरी तरफ से लगातार यह मांग उठाई गई कि पुजारियों का मानदेय दोबारा शुरू किया जाए, ताकि मंदिरों की धार्मिक परंपराएं और पूजा व्यवस्था निर्बाध रूप से चलती रहे।

महेश शर्मा ने बताया कि भगवान महाकाल की कृपा से पश्चिम बंगाल सरकार के शहरी विकास राज्यमंत्री उमेश राय महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे थे। इस अवसर पर पुजारी महासंघ ने अपने आश्रम में उनका स्वागत किया और पश्चिम बंगाल में पुजारियों का वेतन बंद किए जाने के मुद्दे को विस्तार से उनके सामने रखा। मंत्री से आग्रह किया गया कि यह निर्णय सनातन धर्म की भावना के अनुरूप नहीं है। इसलिए यदि सरकार स्वयं को सनातन परंपराओं के प्रति प्रतिबद्ध मानती है, तो मंदिरों के पुजारियों का मानदेय पुनः शुरू किया जाना चाहिए और मंदिरों की पारंपरिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाना चाहिए।

महेश शर्मा ने बातचीत के दौरान सामाजिक समरसता का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि देश में वास्तविक समरसता कहीं दिखाई देती है तो वह देवालयों में दिखाई देती है। मंदिरों में विभिन्न जातियों और समाजों के लोग पुजारी के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं। पुजारी केवल ब्राह्मण ही नहीं, बल्कि दलित, आदिवासी, गुर्जर और अन्य समाजों से भी आते हैं। ऐसे में पुजारियों का मानदेय बंद होने का प्रभाव किसी एक वर्ग पर नहीं, बल्कि सभी समाजों से जुड़े पुजारियों पर पड़ता है।

पुजारी ने आगे कहा कि उमेश राय ने महाकाल मंदिर परिसर में आश्वासन दिया कि पश्चिम बंगाल लौटने के बाद वे इस विषय पर मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पुजारियों के मानदेय और उनकी व्यवस्थाओं को बेहतर एवं सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार स्तर पर सकारात्मक प्रयास किए जाएंगे और इस दिशा में एक उपयुक्त योजना तैयार करने पर विचार किया जाएगा।

--आईएएनएस

पीएसके