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उद्घाटन के चंद दिनों में धंसने लगा लखनऊ-कानपुर हाईवे, अजय राय ने राज्यपाल से उच्चस्तरीय जांच की मांग की

लखनऊ, 11 अगस्त (आईएएनएस)। लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की कथित बदहाल स्थिति को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने अब राजभवन का रुख किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मंगलवार को राज्यपाल को पत्र लिखकर करीब 4,200 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस राष्ट्रीय राजमार्ग की निर्माण गुणवत्ता और लगातार हो रही क्षति की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की। उन्होंने राज्यपाल से इस मामले को प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्तर पर उठाने का भी अनुरोध किया है।
 

लखनऊ, 11 अगस्त (आईएएनएस)। लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की कथित बदहाल स्थिति को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने अब राजभवन का रुख किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मंगलवार को राज्यपाल को पत्र लिखकर करीब 4,200 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस राष्ट्रीय राजमार्ग की निर्माण गुणवत्ता और लगातार हो रही क्षति की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की। उन्होंने राज्यपाल से इस मामले को प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्तर पर उठाने का भी अनुरोध किया है।

अजय राय ने आरोप लगाया कि जिस मार्ग को आधुनिक और तेज यातायात के लिए बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया था, उसकी स्थिति उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद खराब होने लगी। उन्होंने दावा किया कि सड़क के कई हिस्सों में धंसने और बड़े गड्ढे बनने, जल निकासी की समस्या तथा पुलों और क्रैश बैरियर के हिस्सों में दरार जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने सड़क की मरम्मत के बाद दोबारा खराब होने पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि 13 जुलाई को बड़े स्तर पर उद्घाटन किए गए इस मार्ग पर महज दो दिन बाद एक गंभीर दुर्घटना में बाइक सवार की मौत भी हुई। कांग्रेस ने इस घटना और सड़क की गुणवत्ता को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की है। अजय राय ने सवाल उठाया कि यदि हजारों करोड़ रुपए खर्च कर राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया गया था तो उद्घाटन के इतने कम समय बाद सड़क की हालत खराब होने की नौबत क्यों आई। उन्होंने कहा कि यह केवल सड़क निर्माण की गुणवत्ता का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और उसकी निगरानी से जुड़ा गंभीर सवाल भी है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि सड़क की खराब स्थिति के कारण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली रोकनी पड़ी, जिससे करीब 575 करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान की बात सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि परियोजना की गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर हुई और यदि निर्माण में कमी थी तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है। अजय राय ने निर्माण एजेंसी के कथित राजनीतिक संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण करने वाली कंपनी के संबंध भाजपा के एक राज्यसभा सांसद के परिवार से जुड़े हैं और इसी वजह से उसे बचाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में कांग्रेस ने जांच की मांग करते हुए जिम्मेदारी तय किए जाने पर जोर दिया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वह इस मामले को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के समक्ष उठाएं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने हाल में गोरखपुर में जनसुविधाओं और प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी चिंता व्यक्त की थी, ऐसे में लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति पर भी उनकी ओर से हस्तक्षेप की अपेक्षा है। अजय राय ने कहा कि यह परियोजना केंद्र और राज्य के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में शुरू हुई थी और इसकी जिम्मेदारी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा एनएचएआई से जुड़ी है, इसलिए इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र स्तर पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

कांग्रेस ने राज्यपाल से स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने, निर्माण की गुणवत्ता की जांच करने और परियोजना में खर्च किए गए सार्वजनिक धन के इस्तेमाल की पड़ताल कराने की मांग की है। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों, संबंधित मंत्रालय और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करने का अनुरोध किया गया है।

अजय राय ने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि करीब 4,200 करोड़ रुपए की लागत से तैयार सड़क उद्घाटन के इतने कम समय में क्षतिग्रस्त क्यों होने लगी। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए और इसकी जानकारी जनता के सामने रखी जानी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग का मामला केवल किसी एक सड़क की खराब स्थिति का विषय नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक धन, निर्माण गुणवत्ता और सरकारी जवाबदेही से जुड़ा व्यापक जनहित का मुद्दा है।

--आईएएनएस

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