पूरे देश में यूसीसी लागू हो, तुष्टिकरण की राजनीति खत्म करने का समय आ गया: उज्ज्वल दीपक
रायपुर, 27 जून (आईएएनएस)। भाजपा नेता उज्ज्वल दीपक ने पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने और 'लव जिहाद' व धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाने की घोषणा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अब पूरे देश में एक समान कानून लागू करने का समय आ गया है।
उज्ज्वल दीपक ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "सिर्फ पश्चिम बंगाल में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में एक जैसे कानूनों का समय आ गया है। जब हम बराबरी की बात करते हैं तो विपक्षी पार्टियों को असमानता की वकालत नहीं करनी चाहिए। कई दशकों से तुष्टिकरण की नीति चली आ रही है। कुछ समुदायों और धर्मों को खुश करने की जो पुरानी सोच है, वह अब खत्म होनी चाहिए। देश के हर नागरिक के अधिकार और जिम्मेदारियां एक समान होनी चाहिए। सबके लिए कानून भी एक जैसे होने चाहिए।"
उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी के हालिया बयान का जिक्र करते हुए कहा, "शर्मिष्ठा का बयान मैंने भी पढ़ा। उन्होंने बताया कि प्रणब मुखर्जी ने उन्हें कहा था कि नरेंद्र मोदी पहले चुने हुए प्रधानमंत्री हैं। भारत रत्न प्रणब मुखर्जी जैसे सम्मानित व्यक्तित्व की ऐसी टिप्पणी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री पद संभाला है। उनका कार्यकाल स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा।"
सोनिया गांधी के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए उज्ज्वल दीपक ने कहा, "मेरा मानना है कि यूपीए सरकार 2014 में सत्ता से हट गई थी। उसके बाद देश की विदेश नीति पूरी तरह नई हो गई है। विदेश मंत्री नए हैं और प्रधानमंत्री भी नए हैं, जो पिछले 12 वर्षों से अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रहे हैं। विदेश मामलों से जुड़ी कोई भी बात विदेश मंत्रालय, प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री ही उचित ढंग से रख सकते हैं।"
सीबीएसई द्वारा तीन भाषा फॉर्मूला लागू करने के फैसले पर भाजपा नेता ने पूर्ण समर्थन जताया। उन्होंने कहा, "भारत बेहद विविधतापूर्ण देश है, जहां पूरे देश में कई भाषाएं और हजारों बोलियां बोली जाती हैं। सीबीएसई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर छात्र उस भाषा या बोली में सहजता से पढ़ाई कर सके जिसमें वह खुद को सबसे ज्यादा आरामदेह महसूस करता हो। शिक्षा को अधिक समावेशी और सुविधाजनक बनाने की ऐसी पहल का पूरे दिल से स्वागत किया जाना चाहिए।"
--आईएएनएस
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