यूसीसी पर केंद्र सरकार लाए कानून, राज्यवार लागू करना धार्मिक हस्तक्षेप: मौलाना अमानुल्लाह रजा
मुंबई, 7 सितंबर (आईएएनएस)। मौलाना अमानुल्लाह रजा ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी), टीपू सुल्तान, मस्जिदों पर कार्रवाई और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयानों सहित कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने यूसीसी के राज्यवार लागू किए जाने का विरोध करते हुए इसे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बताया। साथ ही, मस्जिदों या अन्य धार्मिक स्थलों को गिराए जाने की आलोचना की।
मौलाना अमानुल्लाह रजा ने कहा कि समान नागरिक संहिता का कानून केंद्र के स्तर पर लाया जाना चाहिए, न कि अलग-अलग राज्यों के माध्यम से। इस्लामी कानून और मुसलमानों को मिले धार्मिक अधिकारों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उत्तराखंड सरकार द्वारा यूसीसी लागू किए जाने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहे कितनी भी बार कानून पारित करे, इससे मुसलमान अपने धार्मिक अधिकारों से पीछे नहीं हटेंगे। भारत में अधिकांश मुस्लिम परिवारों में विवाह को लेकर अलग-अलग सामाजिक व्यवहार हैं, लेकिन इस्लामी अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता।
टीपू सुल्तान को लेकर मौलाना ने कहा कि उनके खिलाफ माहौल बनाना हिंदू-मुस्लिम एकता को प्रभावित करने की कोशिश है। उन्होंने टीपू सुल्तान को देशभक्त और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाला शासक बताते हुए कहा कि अंग्रेज उनसे डरते थे। उन्होंने कहा कि टीपू सुल्तान को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण हो सकते हैं, लेकिन उनके अनुसार देश में उनकी स्मृतियों और योगदान को याद किया जाना चाहिए।
मस्जिदों और धार्मिक स्थलों को गिराए जाने को मौलाना अमानुल्लाह रजा ने अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में कानून और न्यायिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देश में कई ऐसी जगहें हैं जहां वर्तमान सरकारी परियोजनाओं और पुराने धार्मिक ढांचों के बीच विवाद सामने आते हैं। उन्होंने लखनऊ का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल जमीन को सरकारी परियोजना से जोड़कर किसी पुराने धार्मिक स्थल को हटाना लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
मोहन भागवत की ओर से नफरत के खिलाफ दिए गए बयानों पर उन्होंने कहा कि यदि संघ वास्तव में मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता का समर्थन करता है तो उसे स्पष्ट रूप से यह कहना चाहिए कि मुसलमानों के खिलाफ कोई भेदभावपूर्ण कदम नहीं उठाया जाएगा।
वीएचपी की नवरात्रि संबंधी गाइडलाइंस पर मौलाना ने कहा कि संगठन ने यह बयान किस उद्देश्य से दिया, यह वह नहीं जानते। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस्लामी मान्यताओं के अनुसार मुसलमानों को नाच-गाने और पुरुष-महिला के मिश्रित आयोजनों में जाने से बचना चाहिए और अपने धार्मिक नियमों का पालन करना चाहिए।
--आईएएनएस
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