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टीएस सिंह देव बोले- 'हिजाब पहनने पर नहीं होनी चाहिए किसी को कोई आपत्ति', 'मनु स्मृति' पर किया राहुल का बचाव

रायपुर, 26 अगस्त (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने 'हिजाब' विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हिजाब पहनने पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। साथ ही, 'मनु स्मृति' पर टिप्पणी के बाद राहुल गांधी पर भाजपा के हमलों को लेकर टीएस सिंह देव ने कहा कि सच की वजह से कभी अराजकता नहीं फैल सकती।
 

रायपुर, 26 अगस्त (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने 'हिजाब' विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हिजाब पहनने पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। साथ ही, 'मनु स्मृति' पर टिप्पणी के बाद राहुल गांधी पर भाजपा के हमलों को लेकर टीएस सिंह देव ने कहा कि सच की वजह से कभी अराजकता नहीं फैल सकती।

'हिजाब' विवाद पर कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मुझे लगता है कि हिजाब पहनने पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह फैसला अपने निर्णय के आधार पर लिया है। हो सकता है कि लोग इसके खिलाफ अपील करें।"

'मनु स्मृति' और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयानों पर चल रहे विवाद पर टीएस सिंह देव ने कहा, "सच की वजह से कभी अराजकता नहीं फैल सकती। अगर आप सच को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं, तो जब असल सच सामने आता है, तो उससे अव्यवस्था फैल सकती है। जो लोग सच को दबाना चाहते हैं, उन्हें सोचना चाहिए कि कौन अव्यवस्था का माहौल बना रहा है और कौन गलत जानकारी देकर लोगों की भावनाओं को भड़का रहा है।"

इसी बीच, कांग्रेस नेता ने अमेरिका में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। टीएस सिंह देव ने कहा, "अमेरिका का मामला वहां का आंतरिक मामला है, इसलिए हम उस पर क्या कह सकते हैं? लेकिन मोहन भागवत खुद एक ऐसे संगठन के सदस्य या प्रमुख हैं, जो रजिस्टर्ड नहीं है। वह वहां तो रजिस्टर्ड है, लेकिन यहां रजिस्टर्ड नहीं है, जिससे उसकी गतिविधियों पर सवाल उठते हैं। जो समाजसेवा संस्था की छवि थी, वो एक विवादित राजनीतिक छवि में परिवर्तित होती जा रही है। पहले उनके काम को समाज सेवा अधिक माना जाता था, लेकिन अब वह शुद्ध रूप से राजनीतिक हो चुका है।"

वहीं, यूसीसी के मुद्दे पर कांग्रेस नेता ने कहा, "ये धार्मिक रीति-रिवाजों और सामाजिक परंपराओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दे हैं, जिनका पालन सदियों से किया जा रहा है। जब आप इन्हें किसी नई व्यवस्था में ढालने की कोशिश करते हैं, तो मुश्किलें आ सकती हैं। हिंदू धर्म में भी ऐसी कई परंपराएं और मान्यताएं हो सकती हैं जिन पर यूसीसी लागू होने से असर पड़ सकता है और हो सकता है कि लोगों को यह पसंद न आए या इसे स्वीकार करना मुश्किल लगे। एक लंबे समय से धर्मनिरपेक्ष सोच यह रही है कि ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश की जानी चाहिए, जिसमें सभी एक ही कानून का पालन करें।"

--आईएएनएस

डीसीएच/