त्रिपुरा में तस्करी के खिलाफ ईडी ने दायर की तीन अभियोजन शिकायतें, निशाने पर 14 आरोपी
अगरतला, 31 मार्च (आईएएनएस)। त्रिपुरा में मादक और साइकोट्रॉपिक पदार्थों की तस्करी और वितरण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय, अगरतला सब-जोनल कार्यालय ने तीन अभियोजन शिकायतें दायर की हैं। ये शिकायतें धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 44 और 45 के तहत पश्चिम त्रिपुरा के विशेष अदालत, अगरतला में दर्ज की गई हैं। कुल 14 आरोपी इन मामलों में शामिल हैं।
तीनों मामलों का संबंध नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक पदार्थ अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज अपराधों और इनके माध्यम से उत्पन्न अपराध आय की लॉन्ड्रिंग से है।
पहला मामला लिटन साहा और अन्य से जुड़ा हुआ है। ईडी ने यह जांच त्रिपुरा पुलिस (जिरानिया थाने) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की। आरोप है कि लिटन साहा ने कोडीन आधारित खांसी की दवा की तस्करी में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसमें 9,590 बोतलें पुलिस ने जब्त की थीं। जांच में पता चला कि लिटन साहा ने अपने लॉजिस्टिक्स व्यवसाय स्वास्तिक रोडवेज के माध्यम से इस अवैध आय को अपने विभिन्न बैंक खातों में छुपाकर धोखा देने का प्रयास किया।
दूसरा मामला देबब्रत डे और अन्य से जुड़ा हुआ है। इस मामले की जांच ईडी ने दो एफआईआर के आधार पर शुरू की, पहली 1,352 किलो गांजा की जब्ती (पानिसागर थाने) और दूसरी 14,400 बोतल खांसी की दवा की जब्ती (मुंगियाकामी थाने)। जांच में पता चला कि देबब्रत डे और अपु रंजन दास एक अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क के प्रमुख हैं, जो त्रिपुरा से बिहार और अन्य राज्यों में गांजा और अन्य मादक पदार्थ भेजते थे। उनके सहयोगी पुलिस अधिकारी ध्रुबा मजूमदार ने अवैध आय को अपनी पत्नी के नाम पर अचल संपत्तियों में निवेश किया। ईडी ने आरोपियों की कई संपत्तियां जब्त की हैं।
तीसरे मामले में बिशु कुमार त्रिपुरा और अन्य के खिलाफ जांच ईडी ने कई दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की। 243 किलो, 3,390 किलो और 66 किलो गांजा जब्त होने के मामले से यह जांच जुड़ी हुई थी। बिशु कुमार त्रिपुरा और कामिनी देबार्मा ने इस अंतरराज्यीय गांजा तस्करी नेटवर्क में सक्रिय भागीदारी स्वीकार की। आरोपियों ने अपराध आय को अपने और परिवार के खातों, म्यूल खातों, हवाला/हुंडी चैनलों, ईंट उद्योग में निवेश और अचल संपत्ति में परिवर्तित किया।
तीनों मामलों में ईडी ने कुल मिलाकर लगभग 6.85 करोड़ रुपए की संपत्तियां अपराध आय के रूप में जब्त और अटैच की हैं।
--आईएएनएस
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