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त्रिपुरा चिटफंड घोटाला: सीबीआई कोर्ट ने तीन दोषियों को छह साल की सजा सुनाई, निवेशकों को राशि लौटाने के निर्देश

अगरतला, 31 मई (आईएएनएस)। त्रिपुरा चिट फंड मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए निजी कंपनी प्रगति शील इंफ्रा प्रोजेक्ट्स एंड सर्विसेज लिमिटेड और उसके तीन प्रमुख पदाधिकारियों को दोषी करार दिया है।
 
त्रिपुरा चिटफंड घोटाला: सीबीआई कोर्ट ने तीन दोषियों को छह साल की सजा सुनाई, निवेशकों को राशि लौटाने के निर्देश

अगरतला, 31 मई (आईएएनएस)। त्रिपुरा चिट फंड मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए निजी कंपनी प्रगति शील इंफ्रा प्रोजेक्ट्स एंड सर्विसेज लिमिटेड और उसके तीन प्रमुख पदाधिकारियों को दोषी करार दिया है।

पश्चिम त्रिपुरा जिला स्थित अगरतला की सीबीआई अदालत ने शनिवार को कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अरिंदम दास, निदेशक परितोष दास और प्रशासनिक निदेशक दीपशिखा चक्रवर्ती को आम लोगों के साथ धोखाधड़ी और करोड़ों रुपये के गबन के मामले में दोषी ठहराते हुए कठोर कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने तीनों दोषियों को छह-छह वर्ष के कठोर कारावास (आरआई) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर तीन लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं, आरोपी कंपनी प्रगति शील इंफ्रा प्रोजेक्ट्स एंड सर्विसेज लिमिटेड पर सात लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है।

यह मामला उन निवेशकों से जुड़ा है, जिन्होंने कंपनी की विभिन्न जमा योजनाओं में अपनी मेहनत की कमाई निवेश की थी, लेकिन परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद भी उन्हें उनकी राशि वापस नहीं मिली।

इससे पहले, त्रिपुरा सरकार और भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी अधिसूचनाओं के अनुपालन में कैलाशहर पुलिस स्टेशन में दर्ज केस 30 अप्रैल 2012, को आगे की जांच के लिए 8 अक्टूबर 2013 को सीबीआई ने पुनः दर्ज किया था। जांच के दौरान आरोप सामने आया कि कंपनी के पदाधिकारियों ने शिकायतकर्ता सहित बड़ी संख्या में निवेशकों से जमा राशि एकत्र की और बाद में उन्हें भुगतान करने में विफल रहे। आरोपियों पर आम जनता से जमा के रूप में जुटाए गए लगभग पांच से छह करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाया गया था।

सीबीआई की विस्तृत जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद एजेंसी ने 28 मई 2018 को अरिंदम दास, परितोष दास, दीपशिखा चक्रवर्ती तथा कंपनी प्रगति शील इंफ्रा प्रोजेक्ट्स एंड सर्विसेज लिमिटेड के खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया।

अदालत में लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषी पाया और उनके खिलाफ सजा का आदेश पारित किया।

विशेष न्यायाधीश (सीबीआई), पश्चिम त्रिपुरा जिला, अगरतला ने अपने फैसले में निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए हैं। अदालत ने आदेश दिया है कि दोषियों पर लगाए गए जुर्माने की राशि यदि वसूल की जाती है, तो उसे इस उद्देश्य के लिए नियुक्त सक्षम अधिकारियों को भेजा जाए, ताकि जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर, उनाकोटी जिला, कैलाशहर के माध्यम से पीड़ित जमाकर्ताओं के बीच उसका आनुपातिक वितरण किया जा सके।

न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि जिला प्रशासन विभिन्न उप-मंडलों की आवश्यकताओं के अनुसार इस राशि का निष्पक्ष और आनुपातिक वितरण सुनिश्चित करे।

इसके अतिरिक्त, अदालत ने सक्षम अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वे कानून के तहत उपलब्ध प्रावधानों का उपयोग करते हुए आरोपियों की कुर्क की गई संपत्तियों से भी यथासंभव धोखाधड़ी की राशि की वसूली करें। वसूल की गई राशि को उन सभी पहचान किए गए जमाकर्ताओं और निवेशकों के बीच आनुपातिक रूप से वितरित किया जाए, जिन्हें अब तक उनकी जमा धनराशि वापस नहीं मिली है।

--आईएएनएस

एएसएच/पीएम