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ट्रांस-अरुणाचल हाईवे मुआवजा घोटाले में ईडी का बड़ा एक्शन, 6.77 करोड़ की संपत्ति जब्त

ईटानगर, 6 नवंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के ईटानगर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने 'मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम' (पीएमएलए), 2002 की धारा 5(1) के तहत, ट्रांस-अरुणाचल हाईवे (टीएएच) भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में 6.77 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है।
 

ईटानगर, 6 नवंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के ईटानगर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने 'मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम' (पीएमएलए), 2002 की धारा 5(1) के तहत, ट्रांस-अरुणाचल हाईवे (टीएएच) भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में 6.77 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है।

ईडी ने अपने एक आधिकारिक बयान में बताया कि जांच के दौरान सामने आया कि ये संपत्तियां 'अपराध से प्राप्त राशि' के बराबर मूल्य की हैं। जब्त की गई संपत्तियों में पहला पश्चिम सियांग जिले के आलो स्थित येग्गो गांव में एक आवासीय संपत्ति (लगभग 2,250 वर्ग मीटर)। यह संपत्ति जीरो के तत्कालीन उपायुक्त स्वर्गीय केमो लोलेन के नाम पर है और इसे 2.40 करोड़ रुपए के मूल्य तक जब्त किया गया है।

दूसरा पापुम पारे जिले के दोईमुख स्थित टिगडो गांव में 'जेयूच हट्स रिसॉर्ट' (लगभग 10,720 वर्ग मीटर), जो टोको ताजे के बेटे टोको थाट जोतम के नाम पर है और 2 करोड़ रुपए का है और तीसरा पापुम पारे जिले के नाहरलगुन के ए-सेक्टर में एक आवासीय/व्यावसायिक संपत्ति, जो तादार बाबिन के नाम पर है और 2.37 करोड़ रुपए का है, शामिल हैं।

ईडी ने यह जांच अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर स्थित एसआईसी (सतर्कता) पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह मामला टीएएच परियोजना (पोटिन-बोपी खंड) के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजे के आकलन और वितरण में हुई बड़े पैमाने पर अनियमितताओं से जुड़ा है।

जांच में पाया गया कि सरकारी कर्मचारियों ने निजी व्यक्तियों के साथ मिलीभगत करके और रिकॉर्ड में हेरफेर करके, फर्जी या अयोग्य लाभार्थियों को 44.98 करोड़ रुपए का भुगतान किया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा। जिन लोगों की संपत्ति जब्त की गई है, उनमें स्वर्गीय केमो लोलेन (तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर, जिरो), जिन्होंने मुआवजे के वितरण की देखरेख की थी। टोको ताजे (तत्कालीन जूनियर इंजीनियर, याजाली डिवीजन), जो मुआवजे के दावों के लिए संरचनात्मक मूल्यांकन (स्ट्रक्चरल असेसमेंट) में शामिल थे (इनके बेटे के नाम पर मौजूद पारिवारिक संपत्ति को जब्त किया गया है); और तादार बाबिन, जिसे बिना किसी कानूनी अधिकार के धोखाधड़ी से लाभार्थी के रूप में शामिल किया गया था, का नाम शामिल हैं।

जांच से पता चला कि मुआवजे के रिकॉर्ड में एक अयोग्य व्यक्ति को धोखाधड़ी से लाभार्थी के रूप में शामिल करने के बदले में तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर (जिरो) स्वर्गीय केमो लोलेन को कथित तौर पर 2 करोड़ रुपए दिए गए थे। इसके अलावा यह भी पता चला कि 40 लाख रुपए 'मेसर्स तेनजिन एंटरप्राइजेज' के जरिए भेजे गए और बाद में केमो लोलेन को उनके बेटे के माध्यम से सौंप दिए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि 2 करोड़ रुपए टोको ताजे की पत्नी टोको योच के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे, जिसे बाद में कई अलग-अलग खातों के जरिए घुमाया (लेयरिंग) गया। इसके साथ ही यह भी पाया गया कि तादार बाबिन को लगभग 5.47 करोड़ रुपए का मुआवजा मिला, जबकि प्रोजेक्ट एरिया में उसके पास न तो कोई जमीन थी, न कोई ढांचा या अन्य संपत्ति थी और न ही वह मुआवजा पाने का कानूनी रूप से हकदार था।

इस मामले में पहले की गई कार्रवाइयों में लगभग 5.14 करोड़ रुपए के बैंक बैलेंस/डिपॉजिट को फ्रीज करना और 6 फरवरी 2026 को की गई तलाशी के दौरान 2.62 करोड़ रुपए नकद जब्त करना शामिल है, जिसमें लिखा माज से 2.40 करोड़ रुपए और तादार बाबिन से 22 लाख रुपए बरामद हुए थे) और तदार बाबिन और लिखा माज की लगभग 2.37 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों को जब्त किया गया है। इस जब्ती के साथ इस मामले में अब तक जब्त की गई अपराध से अर्जित कुल संपत्ति लगभग 16.90 करोड़ रुपए हो गई है।

इससे पहले ईडी ने 12 मार्च 2024 को एक अभियोजन शिकायत दायर की थी, जिसका संज्ञान विशेष न्यायालय (पीएमएलए), युपिया ने 14 मार्च 2024 को लिया था। इसके बाद, 30 मार्च 2026 को एक पूरक अभियोजन शिकायत भी दायर की गई। ईडी की ओर से आगे की जांच जारी है।

--आईएएनएस

डीके/वीसी