टीएमसी नाम-निशान मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला मान्य होगा : भाजपा सांसद नरेश बंसल
नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। भाजपा सांसद नरेश बंसल ने टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, मायावती की ओर से चंद्रशेखर आजाद और ईवीएम को लेकर दिए गए बयानों, यूपीआई भुगतान से जुड़े मामले और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों पर टिप्पणी की। उन्होंने कई मुद्दों पर विपक्ष के रुख पर सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले में फैसला लेने के लिए चुनाव आयोग को समय सीमा दिए जाने पर नरेश बंसल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला सभी को मानना चाहिए। अब चुनाव आयोग जो फैसला करेगा, वह सुप्रीम कोर्ट के सामने आएगा और आगे जो निर्णय होगा, वह स्वीकार्य होगा।
नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को लेकर मायावती के दावे और भाजपा पर लगाए गए आरोपों पर नरेश बंसल ने कहा कि चुनावी मौसम आने वाला है और ऐसे समय में आरोप-प्रत्यारोप होते रहते हैं। कौन किसके बारे में क्या कह रहा है, इसे चुनावी आरोप-प्रत्यारोप के तौर पर देखा जा रहा है।
मायावती की बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर भाजपा सांसद ने कहा कि जनता का विश्वास चुनाव आयोग और ईवीएम पर है। चुनाव आयोग कई बार राजनीतिक दलों को ईवीएम हैक करके दिखाने की चुनौती दे चुका है, लेकिन जब आयोग की ओर से प्रदर्शन के लिए दलों को आमंत्रित किया जाता है तो कोई अपनी क्षमता साबित करने के लिए आगे नहीं आता।
बंसल ने आरोप लगाया कि चुनाव हारने पर ईवीएम पर सवाल उठाए जाते हैं, जबकि जीत मिलने पर ऐसा नहीं कहा जाता। उन्होंने ईवीएम पर सवाल उठाने की राजनीति को चुनावी जुमला बताया। उन्होंने कहा कि मैंने बैलेट पेपर लूटे जाते देखे हैं, लेकिन ईवीएम लूटे जाने की बात नहीं देखी।
यूपीआई भुगतान से जुड़े केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका और सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगे जाने पर नरेश बंसल ने कहा कि मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जो फैसला देगा, उसे सभी को मानना होगा।
यूपीआई से जुड़े शुल्क को लेकर विपक्ष के इस आरोप पर कि सरकार लगातार नए टैक्स लगा रही है, नरेश बंसल ने कहा कि सरकार ने कोई टैक्स नहीं लगाया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री की ओर से इस संबंध में स्पष्टीकरण दिया जा चुका है। इस व्यवस्था से मिलने वाला पैसा सरकारी खजाने में नहीं जाएगा, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े तीन घटकों के बीच जाएगा। आम उपभोक्ता पर इसका असर नहीं पड़ेगा। 96 प्रतिशत यूपीआई उपयोगकर्ता इस शुल्क की श्रेणी में नहीं आते और व्यक्ति-से-व्यक्ति लेनदेन पर भी इसका प्रभाव नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि 2 हजार रुपए से अधिक के कुछ व्यावसायिक लेनदेन पर शुल्क लागू होने की बात है और इसमें भी सीमा तय है। बड़े कारोबारी या विक्रेता के लिए अधिकतम शुल्क 300 रुपए तक सीमित है, चाहे लेनदेन की राशि उससे अधिक क्यों न हो।
चुनाव आयोग को लेकर जेपी नड्डा की ओर से विपक्ष पर लगातार झूठे आरोप लगाने और देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाए जाने पर नरेश बंसल ने उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जेपी नड्डा ने सही बात कही है। विपक्ष चुनाव में हार से हताश और निराश होकर बेबुनियाद आरोप लगा रहा है। भाजपा केवल सत्ता सुख लेने के लिए नहीं, बल्कि आम आदमी के जीवन में बदलाव लाने के उद्देश्य से काम कर रही है।
--आईएएनएस
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